विधानसभा चुनाव २०२७
हर चुनाव से छह महीने पहले सत्तारूढ़ दल के लिए कानून व्यवस्था एक चुनौती बन जाती है। एक बार नहीं कई बार देखा गया है कि चुनाव से ठीक पहले एकदम अपराधों की बाढ़ सी आ जाती है। अपराधी खुलेआम पुलिस को चुनौती देते हैं। अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश में कई जनपदों में एकदम अपराधों की बाढ़ आ गई। हालांकि कुछ घटनाएं पारिवारिक विवाद के चलते हुई हैं, लेकिन वो सब प्रमुख सूर्खियां बनीं। इसलिए छह माह पुलिस के लिए काफी चुनौतीपूर्ण हैं। वैसे उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार के चलते बहुत सख्त एक्शन हो रहे हैं, लेकिन उसके बावजूद भी घटनाएं लगातार हो रही हैं। अपराधियों को पंचर भी किया जा रहा है तो फुल एनकाउंटर भी हो रहे हैं। दरअसल अपराधों का तरीका बदल गया है। जितने भी एनकाउंटर हुए हैं उनमें किसी भी अपराधी का कोई पुराना लंबा-चौड़ा आपराधिक इतिहास नहीं रहा है, लेकिन कुछ इस तरह की घटनाएं हो रही हैं जिससे कानून व्यवस्था प्रभावित हो रही है। इसी कारण सख्त एक्शन भी हो रहे हैं। दरअसल पहले अपराधियों का एक लंबा-चौड़ा इतिहास होता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। नये-नये अपराध के तरीके हो रहे हैं। फिर भी योगी सरकार मुंहतोड़ जवाब दे रही है। कानून व्यवस्था पर सवाल उठाने से पहले ही सख्त एक्शन हो रहे हैं। उसके बावजूद भी चुनावी मौसम है और आगे इस तरह की और घटनाएं नहीं होंगी इससे इनकार नहीं किया जा सकता है। क्योंकि इस चुनावी मौसम में बहुत से लोगों को राजनीतिक संरक्षण मिल जाता है। वैसे योगी सरकार का खौफ जरूर है। उसके बावजूद भी संरक्षण देने वाले बाज नहीं आते हैं। बहरहाल पुलिस को ज्यादा मुस्तैद रहने की जरूरत है, खुफिया तंत्र को मजबूत करने की जरूरत है, मुखबिरी सिस्टम को भी मजबूत करने की जरूरत है। पुलिस को अपने नेटवर्क को और मजबूत करने की जरूरत है। आम लोगों से अच्छे संबंध बनाकर उनसे इनपुट मिलता है और पुलिस को और अपना भरोसा जनता में मजबूत करना होगा। ताकि समय रहते आम लोग पुलिस पर भरोसा करते हुए पुलिस को सहयोग करें और पुलिस के साथ कांधे से कांधा मिलाकर चलें। ये तभी संभव है जब पुलिस खुद आम जनता से दोस्ती का हाथ बढ़ाये। क्योंकि जनता से मिले सहयोग से बड़ी-बड़ी घटनाएं टाली जा सकती हैं। आज स्थिति यह है कि पुलिस का यह ही पता नहीं चलता कि उसके क्षेत्र में कौन संभ्रांत व्यक्ति रहते हैं और कौन अपराधी। यही कारण है कि पुलिस का नेटवर्क आम लोगों में कमजोर हुआ है। इसलिए समय पर सूचनाएं नहीं मिल पातीं। बड़ी-बड़ी घटनाएं आपसी सहयोग से टाली जा सकी हैं। इसमें कोई दोराय नहीं है। जय हिन्द