गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात और यूपी के ताकतवर आईएएस संजय प्रसाद की भाजपा के राष्टï्रीय अध्यक्ष से मुलाकात के बाद योगी आदित्यनाथ ने मंत्रालयों का बंटवारा कर दिया। ये चर्चा चल रही थी कि दिल्ली में जो मंत्रालय देने की बात कही है उस पर योगी जी अमल करेंगे लेकिन मंत्रालयों का बंटवारा जिस तरह से हुआ है मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ये अहसास करा दिया कि मंत्रालयों के बंटवारे में संवैधानिक तौर पर मुख्यमंत्री को जो अधिकार है उसका वे पूरा पालन करेंगे और वही हुआ। दिल्ली के बताये हुए मंत्रालयों में से एक को छोड़ दें तो मुख्यमंत्री ने अपने विवेक से मंत्रालयों का बंटवारा करके अपनी ताकत का अहसास करा दिया। सोशल मीडिया पर लगातार ये चल रहा था कि गृहमंत्रालय भी मुख्यमंत्री से जाएगा, पीडब्ल्यूडी भी जाएगा, लेकिन ऐसा हो ना सका। ना गृहमंत्रालय गया और ना ही सबसे महत्वपूर्ण विभाग पीडब्ल्यूडी विभाग का बंटवारा हुआ। मंत्री पद की शपथ लेने से पहले ही इस बात की चर्चा बड़े जोरों पर थी कि भूपेंद्र चौधरी मंत्री बनेंगे और पीडब्ल्यूडी उन्हें मिलेंगा। लेकिन मंत्री जरूर बने मगर पीडब्ल्यूडी नहीं मिला। दरअसल, पीडब्ल्यूडी में अभी हाल ही में हुए कुछ टेंडरों को लेकर बहुत बवाल मचा था। मुख्यमंत्री के संज्ञान में आने के बाद कई टेंडर निरस्त भी हो गये थे। दरअसल, पीडब्ल्यूडी विभाग हमेशा चर्चाओं में रहा है। इसलिए मुख्यमंत्री ने इसे अपने पास रखा। मंत्रालयों के बंटवारे में महाराज जी ने पूरी अपनी चलाई है और अहसास करा दिया कि वो यूपी में कमजोर नहीं है। मुख्यमंत्री अब हटे, तब हटे ये चर्चाएं एक गुुट दो साल से चला रहा है। लेकिन ये सबकुछ चर्चाओं में ही है और अब विधानसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो गई है ऐसे में मुख्यमंत्री के हटने की चर्चाएं केवल अब चर्चा ही रहेगी खबरे नहीं बनेगी। वैसे भी यूपी में योगी आदित्यनाथ एक मजबूत चेहरा है। उनके बिना सरकार बनाना भाजपा के लिए आसान नहीं है। ये अलग बात है कि दिल्ली और यूपी के बीच बहुत कड़वाहट है लेकिन कभी-कभी ये कड़वाहट भी सहना पड़ती है और फिलहाल यूपी और दिल्ली के बीच कुछ ऐसा ही चल रहा है। जय हिंद