गाजियाबाद को जब नगर निगम बनाया गया था तब कई व्यवस्थाएं बनाई गईं थी। नगर निगम को संचालित करने के लिए नगर निगम एक्ट बनाया गया था। यह अलग बात है कि अब तक ना जाने कितनी बार उस एक्ट के नियमों का पालन नहीं किया गया। सबसे बड़ी बात तो यह है कि नियम हर माह नगर निगम की बैठक होने का है। मगर कितने महीने में एक बैठक होती है यह किसी को भी बताने की आवश्यकता नहीं है। सभी जानते हैं कि पार्षद बैठक बुलाने की मांग करते ही रहते हैं। जैसे कि आज कितने महीने के बाद कार्यकारिणी हो रही है। हाउस टैक्स को लेकर क्या क्या नहीं हुआ। इस पूरे प्रकरण को गाजियाबाद का एक एक व्यक्ति जानता है। बोर्ड बैठक में नई हुई दरें निरस्त होने के बाद भी बढ़ी हुई दरें लागू कर दी गईं। मगर मैं बात करना चाहता हूं नगर निगम के जोनल चेयरमैन व्यवस्था की। गाजियाबाद नगर निगम में पांच जोन हैं। पहले प्रत्येक जोन में पार्षद को जोनल चेयरमैन बनाया जाता था। इसके लिए बाकायदा चुनाव होता था, प्रत्याशी बनते थे, नामांकन होता था, जरूरत पडऩे पर मतदान भी होता था। मगर अब देखते हैं कि गाजियाबाद नगर निगम से जोनल चेयरमैन की व्यवस्था को तकरीबन समाप्त ही कर दिया गया है। लंबे समय से किसी भी जोन में कोई जोनल चेयरमैन बनाया ही नहीं गया है। नगर निगम प्रशासन तो ऐसा करेगा ही क्यों, मेयर ने भी जोनल चेयरमैन बनाने का कोई प्रयास नहीं किया। हैरानी की बात यह है कि पिछले तीन वर्षों में किसी पार्षद ने भी जोनल चेयरमैन के चुनाव की कोई मांग ही नहीं की। ऐसा तो है नहीं कि नगर निगम में जोनल चेयरमैन कोई बेकार की व्यवस्था थी, इसकी कोई जरूरत ही नहीं थी। क्योंकि ऐसा होता तो ऐसी कोई व्यवस्था बनाई ही नहीं जाती। हां अब इसकी जरूरत क्यों नहीं है, इस सवाल का जवाब तो मेयर और पार्षद ही दे सकते हैं।