गाजियाबाद (युग करवट)। पुलिस कमिश्नरेट स्थापना को लेकर जब भी कोई जिक्र होगा तो उसमें गाजियाबाद के प्रथम पुलिस आयुक्त रहे अजय मिश्रा की कार्यप्रणाली का जरूर जिक्र आयेगा। क्योंकि उनके कार्यकाल में जिस तरह से गाजिायाबाद में कमिश्नरेट सिस्टम को लागू किया गया वो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धी है। ये कहा जाए कि अजय मिश्रा द्वारा जो पिच तैयार की गई थी उसी पर बल्लेबाजी हो रही है तो गलत नहीं होगा।
दरअसल, गाजियाबाद में कमिश्नरेट सिस्टम जब लागू किया गया था तो यहां की जनता इस सिस्टम से बिल्कुल अंजान थी। जनता के साथ पुलिस विभाग और पुलिस के कर्मचारी भी कमिश्नरेट सिस्टम से बिल्कुल अंजान थे। दशकों से एसएसपी के रूप में ही यहां पर तैनाती होती थी और आम आदमी सीधा पुलिस कप्तान से मिलता था।
पुलिस के लिए भी ऊपर भगवान और नीचे पुलिस कप्तान वाली कहावत दशकों से चरितार्थ थी। एक दम व्यवस्था बदली और कमिश्नरेट पुलिस व्यवस्था लागू कर दी गई। गाजियाबाद के लोग सोचने लगे कि अब कैसे काम होगा? किस तरह जिला चलेगा? तमाम चर्चाएं चलने लगी। प्रथम पुलिस आयुक्त के रूप में अजय मिश्रा की तैनाती हुई। मिजाज के बहुत ही कडक़ आईपीएस अजय मिश्रा ने कार्यभार संभालते ही यहां ऐसी व्यवस्था की कि लोगों को लगने लगा कि वास्तव में अब सबकी सुनवाई होगी। पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था से अंजान लोग जब पुलिस आयुक्त से मिलते थे तब उन्हें लगता था कि उनकी सुनवाई हो रही है और उस पर एक्शन भी होता था। जिले में आईपीएस की तैनाती हुई, अलग जोन बने, एसपी सिटी एसपीआरए की जगह डीसीपी सिटी जोन और डीसीपी रूरल और डीसीपी ट्रांस हिंडन की तैनाती हुई। पहले एसपी सिटी के अंडर में ही ट्रांस हिंडन आता था। प्रथम पुलिस आयुक्त अजय मिश्रा ने जिस तरह से यहां कमिश्नरेट सिस्टम लागू किया और अधीनस्थ अधिकारियों का पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम को लेकर माइंड सेट किया आज वही सिस्टम चल रहा है। गाजियाबाद में नये थानों का प्रस्ताव भी उन्हीं के कार्यकाल में हुआ। थानों की कायाकल्प के प्रस्ताव भी अजय मिश्रा के कार्यकाल में तैयार किये गये जो अब अमल में आ रहे हैं। कमिश्नरेट सिस्टम से अंजान लोग आज पूरी तरह से एक सिस्टम का हिस्सा बन गये हैं और गाजियाबाद में प्रथम पुलिस आयुक्त के रूप में अजय मिश्रा ने जो कार्य किये थे उसी को अब आगे बढ़ाया जा रहा है। क्योंकि अगर कमिश्नरेट सिस्टम सही तरीके से लागू नहीं होता तो शायद इतनी जल्दी लोगों का माइंड सेट नहीं होता।
कई उद्योगपतियों का कहना है कि अजय मिश्रा के कार्यकाल में जिस तरह का माहौल बनाया गया और एक सिस्टम सेट किया गया उसी के मद्देनजर अब आगे चला जा रहा है। जाहिर है कि जिसका नाम पहली बार नई शुरूआत पर लिखा जाता है फिर उसे लोग कभी नहीं भूलते। कमिश्नरेट सिस्टम का जब भी जिक्र आएगा तो प्रथम पुलिस आयुक्त के रूप में अजय मिश्रा की कार्यप्रणाली हमेशा याद रहेगी।