तीन जिलों के महज ३० जोड़ों ने रचाई शादी
नगर संवाददाता
गाजियाबाद (युग करवट)। शुक्रवार को उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की ओर से संचालित कन्या विवाह योजना के तहत कविनगर रामलीला मैदान में गाजियाबाद, बुलंदशहर और हापुड़ जिलों के जोड़ों का सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन किया गया। हालांकि यह आयोजन पूरी तरह से औपचारिकता भर रहा है। शासन ने इस समारोह के लिए तीनों जिलों को दो सौ का टारगेट दिया था लेकिन बामुश्किल 92 जोड़ों का ही पंजीकरण हो पाया। हालांकि समारोह में 62 जोड़ों के उपस्थित होने का दावा अधिकारियों ने किया लेकिन वहां भी मुश्किल से तीस जोड़े ही पहुंच सके।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि के रूप में राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार नरेन्द्र कश्यप, सीडीओ अभिनव गोपाल ने दीप प्रज्जवलित कर किया। इस अवसर पर उन्होंने नवविवाहित जोड़ों को आर्शीवाद देते हुए कहा कि यह बेहद खुशी का दिन है, जब गरीब श्रमिकों की बेटियां पूरे सम्मान और धूमधाम के साथ विदा हो रही हैं। प्रदेश सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ सभी धर्मो के लोग उठा रहे हैं और जीवन स्तर को बेहतर बना रहे हैं। सरकार न सिर्फ प्रदेश की बच्चियों की पढ़ाई लिखाई का खर्च उठा रही है वहीं उनके विवाह कराकर उन्हें सम्मान से विदा भी कर रही है। मंत्री नरेन्द्र कश्यप ने कहा कि इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक जोड़े को 85 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई, जिससे विवाह संबंधी खर्चों में मदद मिल सके। यह पहल सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसके तहत समाज के कमजोर वर्गों को सशक्त बनाने का प्रयास किया जा रहा है। सीडीओ अभिनव गोपाल ने कहा कि इस योजना के तहत श्रमिकों की बेटियों की शादी हो रही है जिसमें विवाह का खर्च से लेकर अन्य सामान तक भी उपलब्ध कराएं जा रहे हैं।
श्रमिकों को भी वह सम्मान मिल रहा है जिसके वह हकदार हैं। इसके उपरांत जोड़ों को हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार फेर और मुस्लिम समुदाय के लिए निकाह की व्यवस्था की गई। राज्यमंत्री व अधिकारियों ने विवाहित जोड़ों को आर्शीवाद दिया और उनके दांपत्य जीवन की मंगल कामना की। इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति भी कलाकारों द्वारा दी गई। कार्यक्रम का संचालन पूनम शर्मा ने किया। इस अवसर पर उप श्रमायुक्त अनुराग मिश्रा आदि अधिकारी मौजूद रहे।
तीनों जिलों से एक भी जनप्रतिनिधि नहीं रहा मौजूद
गाजियाबाद (युग करवट)। कविनगर रामलीला मैदान में आयोजित हुए सामूहिक विवाह समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश के श्रम मंत्री अनिल राजभर को शामिल होना था। लेकिन लखनऊ में कार्यक्रम होने के चलते वह गाजियाबाद नहीं पहुंच सके। वहीं विभाग के निमंत्रण पत्र में अतिथि के रूप में कैबिनेट मंत्री सुनील शर्मा का नाम भी दर्ज था, वह भी नहीं पहुंचे। सिर्फ राज्यमंत्री नरेन्द्र कश्यप ने इसमें शिरकत की। इतना ही नहीं कार्यक्रम के बैनर पर जिले के सभी जनप्रतिनिधियों के नाम लिखे गए थे लेकिन जिले से एक भी जनप्रतिनिधि समारोह में शामिल नहीं हुआ। इतना ही नहीं हापुड और बुलंदशहर से भी कोई जनप्रतिनिधि नहीं पहुंचा। तीनों जिलों से अधिकारियों की संख्या भी बेहद कम रही। डीएम रविन्द्र कुमार मांदड़ भी अन्य कार्यक्रम में व्यस्त रहने के चलते समारोह में नहीं पहुंच पाएं।
औपचारिकता के तौर पर जोड़ों ने लिए फेरे
गाजियाबाद (युग करवट)। सामूहिक विवाह का आयोजन में शामिल हुए जोड़ों ने भी शादी के नाम पर औपचारिकता निभाने के लिए जयमाला और अन्य रस्में निभाई। जबकि इन जोड़ों की शादियां आगामी दिनों में पारिवारिक समारोह में सम्पन्न कराई जाएगी। महज चार युवतियां ही दुल्हन के वेश में विवाह स्थल पर पहुंची थी, बाकी नवविवाहिता सामान्य कपड़ों में ही विवाह की वेदी पर बैठी नजर आई। वहीं दुल्हे भी सामान्य कपड़ों में नजर आएं। बिना हल्दी-महेंदी लगाए दुल्हा-दुल्हन विवाद वेदी पर बैठे थे। बुलदंशहर से आए अभिभावकों ने बताया कि यहां सिर्फ औपचारिक रूप में शादी कराई जा रही है। विधिवत शादी तय मुहुर्त में कराई जाएगी। यह स्थिति अधिकतर जोड़ों की नजर आई।

खाना बनाया नौ सौ व्यक्तियों का, मौके पर मौजूद रहे करीब चार सौ
गाजियाबाद (युग करवट)। सामूहिक विवाह समारोह में लोगों के लिए भोजन का भी विशेष प्रबंधन किया गया था। भोजन बनाने वाले ठेकेदार ने बताया कि उनके पास नौ सौ व्यक्तियों के लिए खाना बनाने का ठेका है। हालांकि विवाह स्थल पर बामुश्किल पांच सौ लोग भी मौजूद नहीं थे। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस स्तर पर विभागीय लापरवाही इस समारोह के दौरान रहीं।
तीन जिलों से सौ जोड़े भी नहीं जुटा पाया श्रम विभाग
गाजियाबाद (युग करवट)। इस विवाह समारोह में दो सौ जोड़ों का विवाह कराने का लक्ष्य रखा गया था। पूर्व में तीन बार सामूहिक विवाह समारोह की तारीख बदली जा चुकी थी। इसके बाद भी एक मई को आयोजित हुए समारोह में गाजियाबाद, बुलंदशहर, हापुड़ जिले के कुल मिलाकर 92 जोड़ों का पंजीकरण होने का दावा श्रम विभाग के अधिकारियों ने किया। हालांकि विवाह समारोह में 62 जोड़ों के पहुंचने का दावा किया गया था लेकिन मौके पर बामुश्किल 40 जोड़े भी नजर नहीं आए। ऐसे में औपचारिकता पूर्ण तरीके से विवाह सम्पन्न कराएं गए। इसमें गाजियाबाद 24, बुलंदशहर से 39 और हापुड से 27 जोड़े लाए जाने का दावा किया गया था।
एक तरफ विवाह के मंत्र तो दूसरी ओर निकाहनामा
गाजियाबाद (युग करवट)। कविनगर रामलीला मैदान में आयोजित हुए सामूहिक विवाह समारोह में सामाजिक समरसता का भी नजारा देखने को मिला। एक ही टैंट में हिंदू रीति-रिवाजों से जोड़ों का विवाह कराया जा रहा था। मंत्रोच्चार के बीच विवाह के मंत्र पढ़े जा रहे थे, वहीं दूसरी ओर मुस्लिम समुदाय के जोड़ों का निकाह मौलवी द्वारा पढ़ाया जा रहा था। दोनों समुदाय के लोग अपने बच्चों के विवाह की प्रक्रिया सम्पन्न कराने में जुटे हुए थे।