उत्तर प्रदेश में कुछ होगा परिवर्तन
विधानसभा चुनाव २०२७ से पहले उत्तर प्रदेश में कुछ नया होने वाला है ऐसी चर्चाएं राजनीतिक क्षेत्रों में चल रही हैं। हालांकि लोकसभा में महिला आरक्षण बिल गिरने के बाद अब केंद्र सरकार तथा भाजपा हाईकमान बहुत ही सोच समझकर कोई बिल संसद में लाने का विचार करेगी। वैसे महिला आरक्षण बिल गिरने का कोई नुकसान भाजपा को नहीं हुआ। वो जिस मिशन को लेकर बिल लायी थी वो कामयाब रहा। दरअसल, राजनीति में बहुत से ऐसे मुद्दे होते हैं जो अपने आप में राजनीतिक मुद्दे बन जाते हैं। महिला आरक्षण बिल गिरने का भी भाजपा को लाभ मिलेगा। दरअसल जो संदेश भाजपा देना चाहती थी उसमें वो सफल रही। बिल पास होता तो भी भाजपा के पक्ष में था और गिरने के बाद भी भाजपा के पक्ष में ही माहौल है। वहीं उत्तर प्रदेश को लेकर बहुत चर्चाएं गरम है। हालांकि दो साल से मुख्यमंत्री को लेकर चर्चाएं चल रही है लेकिन दिल्ली वालों के अंदर इतनी हिम्मत दिखाई नहीं दे रही है कि वो कुछ कदम उठा सके। क्योंकि आज मुख्यमंत्री देश में एक बड़ा चेहरा बन चुके हैं। वो अपने आप में बहुत बड़ी ताकत बन चुके हैं। इसलिए दो साल से चर्चा ही चल रही है कि अब हटने वाले हैं या कुछ होने वाला है लेकिन कुछ नहीं हो रहा है। कोई हिम्मत नहीं जुटा रहा है। दरअसल, यूपी में जिस तरह कानून व्यवस्था का राज चल रहा है, सरकार जितनी मजबूती से चल रही है इन सबको मद्देनजर रखते हुए दिल्ली खामोश है। वहीं अब चर्चा है कि यूपी को कुछ हिस्सों में बांट दिया जाए ताकि फिर किसी एक जाति का वर्चस्व सीटों पर नहीं रहेगा। इसलिए इस लाइन पर भी अंदरखाने काम चल रहा है। अब ये कितना सफल रहेगा ये बड़ा सवाल है। कब तक संभव है ये भी देखने वाली बात है। क्योंकि उत्तर प्रदेश से ही दिल्ली का रास्ता जाता है इसलिए बहुत ही सोच समझकर कोई कदम उठाया जायेगा। लेकिन कुछ जरूर होगा इसकी चर्चा खूब चल रही है। जय हिंद