तत्काल एक्शन के बाद भी
२०१७ के बाद से यूपी का निजाम पूरी तरह से बदल गया है। अगर ये कहा जाए कि कानून का राज है तो गलत नहीं है। लेकिन कानून की सख्ती के बाद भी लोग इस बात को क्यों नहीं समझ रहे हैं कि अब योगी राज है यहां ना कोर्ट है ना सुनवाई होती है सीधा इंसाफ होता है। यानि अपराध करोगे तो फिर बख्शीश नहीं है। अपराधी के लिए केवल और केवल कब्रिस्तान और शमशान ही है। हैरत की बात ये है कि तत्काल एक्शन के बाद भी लोग घिनौनी हरकत करने से बाज नहीं आ रहे हैं। खोड़ा की घटना जिस तरह हुई वो सबके सामने है, घटना की जितनी भी निंदा की जाए वो कम है। एथेलिट चिराग को जिस तरह एक बदले की भावना से मारा गया दोस्ती के नाम पर सीधा कलंक है। दरअसल, सरकार की और पुलिस की सख्ती के बाद भी लोगों के अंदर दहशत और खौफ क्यों पैदा नहीं हो रहा है ये बड़ा सवाल है। आखिरकार मानसिकता क्यों नहीं बदल रही है। तीसरी आंख ने देखा कि पहले एक एनकाउंटर होता था तो लंबे समय तक कोई अपराध नहीं होता था। आज की युवा पीढ़ी गलत रास्ते पर क्यों जा रही है इसके लिए कौन जिम्मेदार है ये भी बड़ा सवाल है। जितने भी एनकाउंटर हुए हैं एक को छोड़ दें तो किसी का भी कोई लंबा अपराधिक इतिहास नहीं है। सभी लोगों का पहला अपराध था और पहले अपराध में ही उन्हें सजा मिल गई। इस एक्शन के बाद भी मानसिकता नहीं बदल रही है, ये बड़ा सवाल है। पहले के अपराधों में, पहले के एनकाउंटर में अब सबकुछ बदल गया है। आपको याद होगा कि किसी थाना क्षेत्र में एनकाउंटर होता था तो फिर पूरे जिले में शांति होती थी। बड़े से बड़ा अपराधी भी क्षेत्र छोड़ दिया करता था। आज जिस तरह अपराधों का टे्रड बदला है ये भी पुलिस के लिए एक चुनौती है। पुलिस का इकबाल बुलंद रहे इसके लिए लगातार प्रयास हो रहे हैं। पुलिस अपराधी को सजा ही दे सकती है और वो लगातार दे भी रही है लेकिन उसके बाद भी कुछ ऐसी घटनाएं हो जाती है जिससे कानून व्यवस्था पर सवाल खड़ा हो जाता है। जरूरत है नई पीढ़ी की काउंसलिंग की, उसकी सोच बदलने की और ये काम परिवार से ही शुरू हो सकता है तब शायद इस तरह की मानसिकता में बदलाव आए। जय हिंद