विधानसभा चुनाव २०२७
२०२७ विधानसभा चुनाव के आते-आते भाजपा फिर २०१७ वाली स्थिति में आकर खड़ा हो सकती है। दरअसल, लोकसभा चुनाव २०२४ में भाजपा को मिली करारी हार के बाद ये लगने लगा था कि अब २०२७ के विधानसभा चुनाव में भाजपा पहले जैसी पारी नहीं खेल पाएगी। हालांकि २०१७ के बाद २०२२ के विधानसभा चुनाव में भाजपा उतनी सीटें नहीं जीत पायी थी लेकिन अपने दम पर बहुमत ले आयी थी। बीच में जातिवाद को लेकर भाजपा पर आरोप लगते रहे हैं। जाति विशेष के लोगों की पोस्टिंग होने लगी है इस तरह के आरोप भी भाजपा के अंदर ही कुछ लोग लगाते रहे। दोनों डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्या लंगोट कसकर योगी आदित्यनाथ के खिलाफ मैदान में थे और ऐसा माहौल बना दिया था कि बाबा अब हटे, तब हटे लेकिन बाबा पूरी मुस्तैदी के साथ डटे रहे और आज देश के अन्य राज्यों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक आईडियल के तौर पर अपनी पहचान बना चुके हैं। छह महीने के अंदर जिस तरह अपराधियों के फुल एनकाउंटर हुए हैं उससे योगी आदित्यनाथ के प्रति लोगों में एक बार फिर विश्वास पैदा हुआ है। दिल्ली वाले चाहकर भी बाबा को टच भी नहीं कर पाये। तीसरी आंख ने देखा कि अभी हाल ही में जिस तरह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पुलिस ने ताबड़-तोड़ फुल एनकाउंटर किये हैं इससे भाजपा एक मजबूत स्थिति में आ गई है और लोगों की जुबां पर आ गया है कि कानून व्यवस्था इसी तरह होनी चाहिए। तीसरी आंख ने देखा कि विपक्ष भी अब सवाल उठाने की स्थिति में नहीं है। हालांकि एनकाउंटर को लेकर कुछ सवाल उठाने की बात की जाती है लेकिन विपक्ष को भी लगता है कि अगर उन्होंने एनकाउंटर पर सवाल किये तो दाव उनके ऊपर उल्टा पड़ेगा। बहरहाल, यूपी में कानून व्यवस्था का राज कैसे स्थापित होता है इसका अहसास योगी सरकार ने करा दिया है। आने वाले दिनों में कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कई जनपदों के पुलिस कप्तान जहां बदलने जा रहे हैं वहीं कुछ पुलिस कमिश्नरेट में बड़े बदलाव की संभावना है। जय हिंद