गाजियाबाद (युग करवट)। पूर्व पार्षद राजेन्द्र त्यागी की याचिका पर एनजीटी ने मामले का संज्ञान लेते हुए इस मामले में सरकार और नगर निगम को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साई उपवन शहर के वन में लगातार कचरा डंपिंग और जलाने, उससे होकर गुजरने वाली नाली के अवरुद्ध होने और सीवेज/अपशिष्ट जल से उसके जलमग्न होने का संज्ञान लेते हुए एनजीटी ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, उत्तर प्रदेश सरकार, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जिला मजिस्ट्रेट, वन विभाग, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण और गाजियाबाद नगर निगम को नोटिस जारी किए हैं। पूर्व पार्षद और बोर्ड सदस्य राजेंद्र त्यागी द्वारा दायर याचिका पर नोटिस जारी किए। न्यायालय ने संबंधित सार्वजनिक प्राधिकरणों और विभागों को अगली सुनवाई की तारीख 2 जुलाई से कम से कम एक सप्ताह पहले अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इतना ही नहीं एनजीटी ने साई उपवन से संबंधित मामलों में न्यायालय से संपर्क करने की स्वतंत्रता भी दी है। राजेन्द्र त्यागी ने कहा कि साई उपवन के भीतर गैर-वन गतिविधियों के कारण लगभग 70,000 पेड़ पूरी तरह से सूख कर नष्ट हो गए हैं। साई उपवन को मास्टर प्लान 2021 और उसके बाद मास्टर प्लान 2031 में शहरी वन के रूप में नामित किया गया है, जो वर्तमान में लागू है। याचिकाकर्ता ने बताया कि 2012 से लेकर आज तक साई उपवन को कचरा फैंकने की जगह में बदल दिया गया है, जहां शहर के अधिकांश वन क्षेत्र में कचरा अभी भी बिखरा हुआ या मिट्टी में मिला हुआ दिखाई देता है।