राजनीति में बदलती तस्वीर
कोई भी बड़े से बड़ा मसला ऐसा नहीं है जो हल नहीं हो सकता, उसके लिए जरूरी है संवाद होना। जहां संवाद बंद हो जाता है वहां समस्या खड़ी हो जाती है। संवाद से बड़ी-बड़ी समस्याओं का हल होते हुए देखा गया है। अभी हाउस टैक्स का एक ताजा मामला सभी के सामने है। हालांकि ये २०२४ से ये मसला चल रहा है लेकिन हाईकोर्ट में पूर्व पार्षदों की याचिका समाप्त होने के अब ये चर्चा का विषय बना हुआ है। साढ़े पांच लाख लोग इस बात से भयभीत हैं कि कई गुना टैक्स अब वो कैसे अदा करेंगे। भाजपा के जनप्रतिनिधि इस बात से परेशान हैं कि जनता ने जो उन्हें वोट जिस उम्मीद से दिया था उस पर वो खरे नहीं उतर रहे हैं। हाउस टैक्स को लेकर बैठे और ठंडे पड़े हुए विपक्षी दल भी सक्रिय हो गये हैं। वो भी अब हाउस टैक्स को लेकर सवाल करने लगे हैं। जाहिर है जनता से जुड़ा मुद्दा है इसलिए आवाज तो उठाना उनकी भी जिम्मेदारी है। अब हाउस टैक्स की लड़ाई भाजपा के अंदर भी चर्चा का विषय बनी हुई है। भाजपा के पार्षद भी अब खुलकर कोई बड़ा फैसला लेने के मूड में हैं। अगर सत्तारूढ़ दल के पार्षद हाउस टैक्स को लेकर इस्तीफे की बात करने लगे तो फिर विपक्ष को एक बड़ा मुद्दा मिल सकता है। 2०२७ का विधानसभा चुनाव में अब कुछ माह बाकी हैं ऐसे में जनप्रतिनिधियों की खामोशी और निगम में भाजपा का प्रचंड बहुमत और चार गुना टैक्स आखिरकार जवाबदेही किसकी है। इसलिए जरूरत इस बात है कि सभी जनप्रतिनिधि मूछों की लड़ाई से बाहर निकले, एक साथ बैठें और कोई ऐसा निर्णय लें जिससे जनता को राहत मिल सके। भाजपा के पांच बार के पार्षद रहे राजेंद्र त्यागी का कहना है कि शासन ने भी कभी चार गुना टैक्स बढ़ाने की बात कभी नहीं कही। उनका कहना है कि उनके पास शासन के ऐसे पत्र भी जिसमें दो गुना टैक्स की भी बात कही गई है जो पूरे उत्तर प्रदेश में कहीं नहीं हो रहा है, योगी सरकार कोई टैक्स नहीं बढ़ा रही है फिर ये गाजियाबाद में चार गुना टैक्स कैसे बढ़ा दिया गया। उम्मीद की जानी चाहिए कि जरूर जनप्रतिनिधि जनता के हितों का ध्यान रखेंगे। जय हिंद