गाजियाबाद की सियासत
मेयर का टिकट जब सुनीता दयाल को मिला था कि तो लोगों का कहना था कि उनको राजनीति का कोई अनुभव नहीं है और निगम का तो बिल्कुल भी नहीं है। इससे पहले जो लोग मेयर रहे उसमें एक पार्षद भी रहीं, एक जीडीए बोर्ड के मेम्बर रहे और एक पत्रकारिता से जुड़े रहे लेकिन सुनीता दयाल पहली बार भाजपा का टिकट पाकर मेयर बनीं लेकिन जिस तरह से वो पारी खेल रही हैं उससे कुछ भाजपा नेताओं की नींद जरूर उड़ गई है। मेयर का कार्यकाल अभी दो साल का बाकी है। उनके कार्यकाल को तीन साल पूरे हो गये हैं। मेयर सुनीता दयाल और कुछ अधिकारियों के बीच जहां दूरियां है वहीं मेयर ने कुछ लोगों की राजनीतिक दुकान बंद करा दी है इससे भी कुछ लोग परेशान हैं। लेकिन उनकी बेबाक बल्लेबाजी से आम जनता काफी खुश है। हालांकि हाउस टैक्स को लेकर जरूर उन्हीं की पार्टी के लोगों ने उनको घेरने की कोशिश की थी लेकिन उसमें भी मेयर ने निगम बोर्ड बैठक बुलाकर बढ़े हुए टैक्स के प्रस्ताव को रद्द कराकर जोर का झटका धीरे से दे दिया था। अब मेयर जिस तरह से पारी खेल रही हैं उससे भी कुछ लोग अंदरखाने अपनी रणनीति बनाते रहते हैं। अन्य जनप्रतिनिधियों का कहना है कि मेयर किसी को साथ लेकर नहीं चलती। दरअसल, महापौर का अपना एक अलग प्रॉटोकॉल है। उनका कार्यक्षेत्र भी बहुत बड़ा है। मेयर के कार्यक्षेत्र में तीन विधायक आते हैं एवं आबादी भी लाखों में है और जिस तरह से वो हर क्षेत्र में जाकर लोगों के बीच समस्याएं सुन रही हैं, एक्शन ले रही हैं, अरबों रुपयों की जमीन माफियाओं से मुक्त करा रही हैं ये उनकी पार्टी के कुछ नेताओं को रास नहीं आ रहा है। बहरहाल, अगर देखा जाए तो जनप्रतिनिधियों में मेयर सुनीता दयाल एक ऐसी जनप्रतिनिधि हैं जो 47 डिग्री के तापमान में भी सडक़ पर दिखाई देती हैं। कैबिनेट मंत्री सुनील शर्मा भी जनसुवनाई में आगे रहते हैं। इनके अलावा सदर विधायक संजीव शर्मा भी एक ऐसे जनप्रतिनिधि हैं जो लगातार जनता के बीच में रहते हैं उनकी समस्याएं सुनते हैं और समाधान कराते हैं। संजीव शर्मा ने भी एक लंबी लकीर जनप्रतिनिधियों के बीच खींच रखी है। पूर्व सांसदों की बात की जाए तो पूर्व राज्यसभा सांसद अनिल अग्रवाल के निवास पर आज भी लोगों की भीड़ रहती है। वो आज भी उसी अंदाज में लोगों का काम कराते हैं। पूर्व सांसद डॉ. रमेश चंद तोमर भी गाजियाबाद की समस्याओं को लेकर समय-समय पर मुख्यमंत्री से मुलाकात करते रहते हैं। बहरहाल मेयर सुनीता दयाल की वर्किंग से उन्हीं की पार्टी के कुछ लोग जरूर परेशान हैं। मेयर सुनीता दयाल के लिए ये शेर बिल्कुल सही बैठता है-
एक ही दिन में पढ़ लोगे क्या मुझे,
मैंने खुद को लिखने में कई साल लगाये हैं।
जय हिंद