जिमखाना क्लब अब बनेगा इतिहास
सौ साल पहले अंगे्रजों ने जो इम्पीरियल जिमखाना क्लब बनाया था अब केंद्र की मोदी सरकार ने उसे खाली करने का आदेश कई दिन पहले दे दिया है। 5 जून तक का समय दिया है। इस क्लब के मेम्बर इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट चले गये हैं। इस मामले में कल हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। इस क्लब का इतिहास बहुत ही अजीबो-गरीब है। देशभर में एक लाख क्लब हैं। दिल्ली में कई सौ क्लब है लेकिन जिमखाना क्लब का मेम्बर बनने के लिए 35 साल की वेटिंग है। 20 लाख की फीस है और यहां पर केवल रसूखदार परिवार के सदस्य ही मेम्बर बन सकते हैं। यही कारण है कि पैदा होने से पहले ही रसूखदार परिवार के लोग अपने परिवार के सदस्यों को मेम्बर बनाने के लिए रजिस्टे्रशन करा लिया करते थे। 1913 में अंगे्रजों ने इसे बनाया था। कनॉट प्लेस का जिसने निर्माण किया था उसी लुटियन ने जिमखाना क्लब का निर्माण किया। आज पांच हजार छह सौ लोग इसके मेम्बर है लेकिन इसके मेम्बर बनने के लिए ना तो किसी मंत्री की सिफारिस चलती और ना ही कोई बड़ेे से बड़ा सूरमा भी मेम्बर नहीं बन सकता था। अंगे्रजों के जमाने से जो कानून चल रहा था वही कानून आजादी के बाद भी चल रहा है। आजादी के बाद पंडित नेहरू इसके वाइस प्रेसिडेंट बने और ऊषा नाथन पहले भारतीय सदस्य बने। इतना ही नहीं 1928 में पहली बार भारतीय अफसरों के लिए मेम्बरशिप खोली गई और 1928 में इम्पीरियल शब्द हटाया गया और दिल्ली जिमखाना क्लब रखा गया। 27 एकड़ में बने इस आलीशान क्लब में आज भी अंग्रेजों वाले कानून ही है। सबकुछ बदल गया है लेकिन कानून वही चल रहा है। खेल के नाम पर बनाये गये इस क्लब में सबकुछ है लेकिन खेल नहीं है। एक हजार रुपए की लीज पर दी गई जमीन को अब केंद्र सरकार ने खाली करने का आदेश दे दिया है राष्टï्रपति के आदेश पर लीज खत्म कर दी गई है। क्लब के मेम्बर जो बड़े रसूखदार और रईसजादे हैं उनको मिर्ची लग गई है लेकिन केंद्र सरकार अपने फैसले पर अडिग है। एक बार राजीव गांधी के जमाने इस क्लब की लीज खत्म होने के लिए नोटिस दिया गया था लेकिन बाद में वो वापस ले लिया गया लेकिन अब मेम्बरों के ये बात याद रखने चाहिए कि ये राजीव गांधी का दौर नहीं है ये मोदी का दौर है और मोदी है तो मुमकिन है। अपने ही देश में अंगे्रजों के बनाये क्लब में भारतीयों को सदस्य बनने के लिए 35 साल का इंतजार और 20 लाख की फीस ये कहां का इंसाफ है। जय हिंद