हाउस टैक्स का मामला
नगर निगम के हाउस टैक्स को लेकर अदालत द्वारा जो फैसला आया है उसने ये अहसास करा दिया कि मूछों की लड़ाई में शहर के साढ़े पांच लोगों पर हाउस टैक्स का बोझ बढ़ गया है। दरअसल, निगम द्वारा बेतहाशा हाउस टैक्स लगाया गया था जिसको लेकर भाजपा के पूर्व पार्षदों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। ये लोग मई में अदालत गये थे। ३0 जून २०२५ को मेयर सुनीता दयाल ने बोर्ड बैठक बुलाकर बढ़े हुए टैक्स के प्रस्ताव को रद्द कर दिया था। इस बोर्ड बैठक में सांसद, मंत्री और सभी विधायक शामिल हुए थे लेकिन इस रद्द हुए प्रस्ताव का कोई लाभ जनता को नहीं मिला। गाजियाबाद से लेकर लखनऊ तक जनप्रतिनिधियों ने इसमें आवाज उठाई, विधानसभा में भी मामला उठा, विधान परिषद में भी इस मामले को उठाया गया लेकिन जनता को कोई लाभ नहीं मिला और सभी ने कहा कि मामला अदालत में विचाराधीन है इसलिए कुछ नहीं कर सकते। आपस की मूछों की लड़ाई के चक्कर में बढ़ा हुआ टैक्स लागू हो गया। साढ़े पांच लाख लोगों की लड़ाई लडऩे का दावा सभी ने किया लेकिन कोई भी अपने कदम पीछे नहीं कर पाया। हाईकोर्ट में डाली गई याचिका में याचिकर्ताओं ने मेयर को भी पार्टी बनाया था। इसके पीछे यही कारण था कि मेयर जनप्रतिनिधि हैं और वो कोई बीच का रास्ता निकाल सकती हैं। कानून के जानकार बताते हैं कि अगर याचिकाकर्ता अपनी याचिका वापस ले लेते तो शायद 30 जून को जो प्रस्ताव रद्द हुआ था उसको लागू किया जा सकता था। यदि महापौर की ओर से एक बोर्ड बैठक बुलाकर अधिकारियों से कहा जाता कि इस प्रस्ताव को लागू करो तो शायद बात बन सकती थी। ये भी कहा जा रहा है कि मामला अदालत में था इसलिए अगर महापौर की ओर से अदालत में शपथ पत्र देकर बताया जाता कि बढ़े हुए टैक्स का प्रस्ताव 30 जून को बोर्ड बैठक में रद्द कर दिया गया है तो शायद अदालत भी दोनों और से सुनवाई नहीं करती। लेकिन ना तो याचिका ही वापस हुई और ना ही कोई शपथ पत्र अदालत में दाखिल किया गया। जाहिर है अदालत में भी निगम द्वारा जो टैक्स लगाया गया उसको मेरिट के आधार पर माना उस फैसले को सही माना और याचिका खारिज कर दी। इस बीच महापौर बराबर लोगों से भी अपील करती रही कि बढ़ा हुआ टैक्स जमा ना करे लेकिन कोई असर नहीं हुआ। इतना ही नहीं वो 20 प्रतिशत छूट की घोषणा भी करती रहीं लेकिन उसमें ये जिक्र नहीं था कि ये 20 प्रतिशत छूट बढ़े हुए टैक्स पर या पुराने टैक्स पर। बहरहाल, आपसी खींचतान के चलते शहर के साढ़े पांच लोगों पर अब बढ़ा हुआ टैक्स का बोझ बढ़ गया है। अब इसका जिम्मेदार कौन है ये देखने वाली बात है। जय हिंद