भारतीय जनता पार्टी ने राजनगर एक्सटेंशन में नारी शक्ति वंदन कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम को लेकर कुछ विवाद जैसी स्थिति बनी। नारी शक्ति वंदन कार्यक्रम में जो कुछ हुआ वह सामान्य तो नहीं कहा जा सकता। मेयर सुनीता दयाल की नाराजगी भी बेवजह नहीं थी। व्यवस्थित कार्यक्रम भाजपा की पहचान है। ऐसे में यदि अव्यवस्थित कार्यक्रम हो जाए तो किसी को भी गुस्सा आना ही है।
पहले तो कार्यक्रम स्थल ही सही नहीं चुना गया। क्योंकि वहां जाने की किसी को आदत नहीं है। दूसरे कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के बारे में निमंत्रण में कोई जानकारी नहीं दी गई। कम्यूनिकेशन गैप का परिणाम था कि वहां मीडियाकर्मी नहीं पहुंचे। इस सबके पीछे के कारण पर गौर करें तो लगता है अभीतक भाजपा महानगर अध्यक्ष मयंक गोयल की टीम में सामंजस्य बन नहीं पा रहा है। समन्वय की कमी दिखाई दे रही है। ऐसा लगता है कि महानगर कमेटी के लोग कार्यक्रम को लेकर आपस में चर्चा भी नहीं करते। पुराने पदाधिकारियों के अनुभव का लाभ लेने का भी प्रयास नहीं किया जाता। अगर किसी बात की जानकारी नहीं है या कम है तो पूर्व के पदाधिकारियों से जानकरी लेकर कार्यक्रम को व्यवस्थित किया जा सकता है। मगर शायद ऐसा करने में वर्तमान पदाधिकारियों को अपमान महसूस होता होगा। सुनने में आया है कि कई पदाधिकारी तो महानगर कार्यालय आ ही नहीं रहे हैं।
भाजपा कार्यकर्ताओं की बात पर विश्वास करें तो महानगर अध्यक्ष के आसपास एक कोकस जैसा बन गया है। कुछ ही लोग संगठन पर पूरी तरह से काबिज होने के प्रयास में हैं। ऐसे में दूसरे पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता खुद को एडजस्ट नहीं कर पा रहे हैं। डाक्टर अंबेडकर जयंती पर भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन्द्र चौधरी आए तो विधायक संजीव शर्मा भी दिख गए। अन्यथा तो जनप्रतिनिधियों ने तो पार्टी कार्यालय आना ही छोड़ रखा है। भाजपा के ही लोग कहने लगे हैं कि भाजपा का महानगर कार्यालय अजीब सी गतिविधियों का केन्द्र बन रहा है। जहां संगठन के कार्यों की चर्चा कम और अन्य काम अधिक किए जा रहे हैं। भाजपा का अनुशासित कार्यकर्ता शायद असहज है।