५६ गाजियाबाद विधानसभा सीट
गाजियाबाद (युग करवट)। गाजियाबाद सदर सीट पर इस बार वैश्य समाज के नेता को टिकट देने की मांग कुछ ज्यादा ही जोर पकड़ रही है। वर्तमान में इस सीट से ब्राह्मïण समाज के मजबूत चेहरे संजीव शर्मा विधायक हैं।
इस सीट पर मौजूदा सांसद अतुल गर्ग ने चुनाव लड़ा था और वो जीत गये थे। बाद में वो लोकसभा चुनाव लड़े और जीत हासिल की। उनके लोकसभा सदस्य बनने के बाद इस सीट पर उपचुनाव हुआ और सांसद अतुल गर्ग ने पूरी मेहनत करके संजीव शर्मा को टिकट दिलाया। हालांकि उस समय कई लोग दावेदार थे, लेकिन अतुल गर्ग ने संजीव शर्मा को ही सबसे बेहतर समझा और मजबूत पैरवी की। जिसके बाद संजीव शर्मा को टिकट ही नहीं बल्कि अच्छे वोटों से उन्होंने जीत भी दर्ज कराई। ब्राह्मïण समाज को टिकट मिलने से सदर सीट पर जो वैश्य समाज का दबदबा चला आ रहा था और हमेशा ये कहा जाता है कि यह सीट वैश्य समाज की है, संजीव शर्मा के जीतने के बाद फिर ये सोच बदली। हालांकि संजीव शर्मा ने चुनाव जीतने के बाद जिस तरह लोगों के दिल में घर बनाया और वो हमेशा एक-दूसरे के साथ खड़े रहे और एक जनप्रतिनिधि के रूप में एक लंबी लाइन खींची वो भी सबके सामने है। संजीव शर्मा का ढाई साल का कार्यकाल रहा। अब संजीव शर्मा २०२७ के विधानसभा चुनाव के लिए भी टिकट की जोर आजमाईश कर रहे हैं। जहां उनका रिपोर्ट कार्ड अच्छा है वहीं सांसद अतुल गर्ग फिर मजबूती के साथ उनके साथ खड़े हैं। लेकिन इस बार वैश्य समाज की तरफ से ये मांग उठी है कि इस सीट पर वैश्य समाज को ही मौका देना चाहिए। हालांकि संजीव शर्मा का कोई विरोध नहीं और वैश्य समाज का कहना है कि पार्टी उन्हें किसी ओर विधानसभा से टिकट दे दे। लेकिन सदर सीट पर इस बार भाजपा से वैश्य समाज को ही टिकट देने की मां्रग की जा रही है। वर्तमान में सदर सीट पर वैश्य समाज के मजबूत चेहरे विभू बंसल, पवन गोयल और मयंक गोयल पूरी मजबूती के साथ तैयारी कर रहे हैं। हालांकि सबसे मजबूत तैयारी जो दिखाई दे रही है वो विभू बंसल की है। उनके लगातार कार्यक्रम लग रहे हैं। हालांकि पवन गोयल भी कार्यकर्ताओं की पसंद बताये जाते हैं और उनका भी लगातार संपर्क उन लोगों से है। मयंक गोयल महानगर अध्यक्ष हैं और उनकी कार्यप्रणाली से कार्यकर्ता अच्छी तरह प्रभावित हैं।
वैश्य समाज के कई लोगों ने बातचीत में कहा कि अगर इस बार भाजपा ने वैश्य समाज को टिकट नहीं दिया तो समाजवादी पार्टी और कांगे्रस पार्टी के संयुक्त संभावित उम्मीदवार अभिषेक गर्ग को वैश्य समाज अपना एकतरफा समर्थन ही नहीं देगा बल्कि वोट भी देगा और भाजपा को ये अहसास भी कराएगा कि वैश्य समाज भाजपा का बंधुआ नहीं है।