गाजियाबाद (युग करवट)। स्वास्थ्य सेवाओं को जिले में और उत्कृष्टï बनाने की दिशा में यशोदा मेडिसिटी ने एक ओर कदम बढ़ा दिया है। विश्व थैलेसीमिया दिवस पर यशोदा मेडिसिटी ने थैलेसीमिया केयार सेन्टर लॉन्च किया। केन्द्र का उद्घाटन उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सुनील शर्मा ने करतेे हुए कहा कि आज भी कई मरीजों को समय पर निदान, सही इलाज की निरंतरता और लंबे समय तक संगठित देखभाल की कमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में यह सेन्टर इन मरीजों के लिए वरदान साबित होगा। यशोदा ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के चेयरमैन व एमडी डॉ.पीएन अरोड़ा ने कहा कि थैलेसीमिया एक ऐसी स्थिति है, जिसमें मरीजों को जीवनभर नियमित ब्लड ट्रांसफ्यूजन, निरंतर सहयोग और व्यवस्थित देखभाल की आवश्यकता होती है। यशोदा मेडिसिटी के इस केंद्र के माध्यम से हमारा उद्देश्य मरीजों को एकीकृत और संवेदनशील उपचार उपलब्ध कराना है, जिससे उनकी जीवन गुणवत्ता और जीवन प्रत्याशा दोनों बेहतर हो सकें। साथ ही, हम प्रीनेटल स्क्रीनिंग, जेनेटिक काउंसलिंग और समय पर जांच को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए भी प्रतिबद्ध हैं, ताकि परिवार सही समय पर बेहतर और जागरूक स्वास्थ्य संबंधी निर्णय ले सकें। हेमेटोलॉजी, हेमेटो, ऑन्कोलॉजी एवं बोन मैरो ट्रांसप्लांट की डायरेक्टर व हेड डॉ.निवेदिता ढींगरा ने कहा कि ब्लड ट्रांसफ्यूजन प्रोटोकॉल, आयरन मैनेजमेंट, संक्रमण नियंत्रण और बोन मैरो ट्रांसप्लांट के बेहतर परिणामों में हुई प्रगति के कारण अब थैलेसीमिया के मरीज पहले की तुलना में बेहतर जीवन गुणवत्ता प्राप्त कर सकते हैं। यह केंद्र विशेष हेमेटोलॉजी सेवाएं, डे-केयर ट्रांसफ्यूजन सुविधाएं, आयरन चेलेशन थेरेपी एवं मॉनिटरिंग, एडवांस डायग्नोस्टिक्स सहित सभी आवश्यक सेवाओं को एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराता है, जिससे मरीजों को सुगम, समन्वित और बेहतर परिणामों पर आधारित उपचार मिल सके। डॉ.ढींगरा ने कहा कि विवाह से पहले काउंसिलिंग और गर्भावस्था के दौरान जांच को बढ़ावा दिया जाएगा ताकि थैलेसीमिया के मामलों को कम किया जा सके और आने वाली पीढिय़ों को इससे बचाया जा सके। इस अवसर पर अस्पताल में थैलेसीमिया मास्टर क्लास और रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया व नियमित रक्तदान पर जोर दिया गया क्योंकि थैलेसीमिया के मरीजों को जीवन भर रक्त की आवश्यकता होती है।