गाजियाबाद के डीसीपी ऋजुल ने एक बच्ची के चेहरे पर खुशी लाने का काम किया। मैं हमेशा से कहता रहा हूं कि अगर गलत कार्य भी भत्र्सना की जाए तो अच्छे काम को सराहा भी जाना जरूरी है। हमने ऐसे अनेक उदाहरण देखे हैं कि जिनमें पुलिसकर्मी गरीब की ठेली पलटते, सामान फेंकते नजर आते हैं। ऐसा कम ही देखने को मिलता है कि कोई पुलिसकर्मी किसी गरीब की सहायता करे। मगर डीसीपी ऋजुल ने ऐसा काम किया। त्यौहार पर सुरक्षा एवं कानून व्यवस्था को लेकर आजकल पुलिस अधिकारी लगातार गश्त और मार्च कर रहे हैं। डीसीपी ऋजुल भी पुलिसकर्मियों के साथ ट्रांस हिंडन में गश्त कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें सडक़ किनारे रंगोली के रंग बेच रही एक छोटी बच्ची दिखाई पड़ी। बच्ची कुछ उदास लग रही थी। परेशान बच्ची को देखकर ऋजुल उसके पास गए और बातचीत प्रारंभ की। पूछने पर बच्ची ने उदासी का कारण सामान की बिक्री नहीं होना बताया। पूरे दिन में वह बच्ची मात्र दो सौ यपए का ही सामान बेच पाई थी, जो नाकाफी था। अब यहां डीसीपी ऋजुल ने वह किया जिसकी कल्पना उस छोटी बच्ची ने भी नहीं की थी। डीसीपी ने बच्ची से पांच सौ रुपए का सामान खरीद लिया। अब तक उदास बैठी बच्ची का चेहरा अब खुशी और संतुष्टïी से दमकने लगा था। जो कुछ हुआ वह उस बच्ची के लिए अकल्पनीय था। बच्ची का त्यौहार हो चुका था। डीसीपी ने साथ चल रहे पुलिसकर्मियों से भी कहा कि कोई भी परेशान दुकानदार, रेहड़ी पटरी वाला दिखाई दे और लगे कि वह बिक्री नहीं होने से परेशान है, तो उससे कुछ सामान जरूर खरीदें। डीसीपी ऋजुल की इस पहल का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब पसंद किया जा रहा है। लोग उनकी सराहना भी कर रहे हैं। मैं तो हमेशा से कहता रहा हूं कि त्यौहर वह नहीं है कि आपका घर रोशन है। त्यौहार तो तब है जब आपके आसपास के सभी घरों में रोशनी हो। दिवाली है तो अपने लिए मिट्टी के दीये जरूर खरीदें। आसपास कोई ऐसा व्यक्ति है जो आर्थिक तंगी में है तो त्यौहार पर उसकी सहायता करे। क्योंकि दीपावली पर राम सभी के घर आने चाहिए। अपने आसपास के जरूरतमंद, गरीब के घर मिठाई और पकवान भी जरूर भेंजे। क्योंकि राम सबके हैं, दिवाली भी सभी की होनी चाहिए।