अभी कुछ दिन पहले मैंने इसी कॉलम में गाजियाबाद के जवाहर लाल नेहरू युवा केन्द्र एवं कविनगर रामलीला के जानकी भवन को लेकर लेख लिखा था। मैंने लिखा था कि गाजियाबाद को जवाहरलाल नेहरू युवा केन्द्र भी चाहिए और जानकी भवन भी। पाठक जानते ही हैं कि इन दोनों स्थानों पर विवाद आ गया है। जानकी भवन को तो जीडीए ने अपने कब्जे में ही ले लिया है। जवाहर लाल नेहरू युवा केन्द्र पर बच्चे क्रिकेट समेत कई ओर खेलों का अभ्यास करते हैं। मगर कभी सुनने में आता है कि वहां हैलिपेड बनाया जा रहा है। कभी सुनते हैं कि कुछ निर्माण आदि का प्रयास किया जा रहा है। जवाहर लाल नेहरू युवा केन्द्र पर भी प्रशासन की जांच चल रही है। अब हेलिपेड बने या कुछ और, अगर खेल के मैदान में कुछ निर्माण किया जाएगा तो प्रभावित तो बच्चों की खेल गतिविधियां ही होंगी। गाजियाबाद में एक फुटबाल खिलाड़ी थे जिनका नाम था गगन सेठी। वर्ष 1998-99 तक एमएमएच में पढ़े अधिकतर लोग गगन सेठी के नाम से परिचित हैं। उसके बाद वह पत्रकारिता में आ गए और वर्तमान में टीवी न्यूज चैनल आजतक के खेल विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। गाजियाबाद को जवाहर लाल नेहरू युवा केन्द्र भी चाहिए और जानकी भवन भी, इस लेख पर गगन सेठी ने मार्मिक प्रतिक्रिया दी है। गगन का कहना है कि अगर जवाहर लाल नेहरू युवा केन्द्र नहीं होता तो वह खिलाड़ी ही नहीं बन पाते। पूरा बचपन इसकी हरी घास और मिट्टी में बीता है। शहर के दिल की धमनियां रोकने को तैयार बैठे हैं शहर के कुछ नेता। जब ओलंपिक आएंगे तो कहा जाएगा कि हमारे खिलाडिय़ों को मेडल नहीं मिल पाते। गगन सवाल उठाते हैं कि क्या खाक मेडल मिलेंगे। जब शहरों में खिलाडिय़ों को सुविधाए ही नहीं हैं। गगन कहते हैं कि एक तो प्रदूषण से वैसे ही गाजियाबाद का दम घुटा रहता है। एक खुली जगह बच रही है जो कुछ लोगों को अखर रही है। आलीशान दुकानों की नींव में दबने वाली है बुजुर्गों की आवाज और खेलते-कूदते बच्चों की किलकारियां। यह सच भी है दर्द तो वही महसूस करेगा जो जड़ों से जुड़ा होगा। कितने ही खिलाड़ी ऐसे हैं जिनको जवाहर लाल नेहरू युवा केन्द्र की वजह से खेलों में अच्छा मुकाम हासिल हुआ है। अब यदि नेहरू युवा केन्द्र में खेल की गतिविधियां बंद हो जाएंगी तो आने वाले खिलाडिय़ों का तो भविष्य ही बर्बाद हो जाएगा। इसलिए मैं कहता हूं कि यहिद जवाहर लाल नेहरू युवा केन्द्र में खेल गतिविधियों पर कोई व्यवधान आता है तो खेल जगत से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति को, खेल संस्थाओं को यहां तक कि खेल को प्रेम करने वाले हर नागरिक को आगे आना चाहिए और इसे बचाना चाहिए। गाजियाबाद प्रशासन, जीडीए आदि भी यहां खेल को प्रोत्साहन दें, खिलाडिय़ों को अत्याधुनिक सुविधाएं दें तो बहुत ही बेहतर होगा। क्योंकि यह अकेले गगन सेठी का दर्द नहीं है, यह खेल को चाहने वाले हर एक इंसान का दर्द है। खेल में व्यवधान नहीं आना चाहिए।