राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के चरणों में बैठकर जिस तरह चढ़ावे में चोरी का मामला सामने आया है, ये बहुत गंभीर है। इसके पीछे भी जो साजिश है वो काफी गंभीर है और इस पूरे प्रकरण के पीछे एक दूसरे को निपटाने और कांटे से कांटा निकालने की रणनीति है। बड़ी रणनीति ये है कि राम मंदिर आंदोलन ट्रस्ट के सदस्यों को हटाकर काशी विश्वनाथ मंदिर की तरह, मां वैष्णो देवी एवं अन्य जो बड़े धार्मिक मंदिर हैं ठीक उसी की तरह अयोध्या में भी राम मंदिर में सीईओ की तैनाती की जाए। प्रधानमंत्री कार्यालय में तैनात नृपेंद्र मिश्रा इस बात की ओर कई बार इशारा कर चुके हैं। दरअसल, चंदा चोरी का मामला पांच जून को सामने आया, 6 जून को बड़े ट्रस्टी को जानकारी मिली और 7 जून को फिर ये खबर बाहर आ गई। ऐसा नहीं है कि इस तरह पहली बार हुआ हो। पूर्व लेखाकार रहे महिपाल सिंह ने एक चैनल को बताया कि इससे पहले भी चंदा चोरी हुआ था लेकिन उसे दबा दिया गया, कोई कार्रवाई नहीं हुई और उन्हें पद से हटा दिया गया। इस बार मामला बड़ा था, 7 जून को इस मामले में एफआईआर करने की बात कही लेकिन कोई फोन आया उसके बाद फिर एफआईआर नहीं हुई। दरअसल, राम मंदिर पर पूरी तरह से आरएसएस का ही कब्जा है। मुख्य रूप से चंपत राय, गोपाल राव, अनिल मिश्रा, गिरि जी महाराज, ये सभी संघ से जुड़े हैं। जब मामला खुला तो इन लोगों पर उंगलियां उठी तो फिर दिल्ली ने इस मामले को गंभीरता से लिया। जो अखबार और इलेक्ट्रॉनिक चैनल दिल्ली और लखनऊ से चलते थे उन्होंने इसे प्रमुखता से उठाया। नृपेंद्र मिश्रा का ये बयान अपने आप में बहुत अहम है कि 2021 से सबक नहीं लिया। दरअसल 2021 में जमीन घोटाले को लेकर विपक्ष ने चंपत राय को घेरा था। लेकिन उस वक्त कोई कार्रवाई नहीं हुई। नृपेंद्र मिश्रा का यही कहना है कि अगर हम 2021 से सबक लेते तो फिर ये घटना नहीं होती। नृपेंद्र मिश्रा का सीधा इशारा चंपत राय की तरफ था और चंपत राय का मतलब अप्रत्यक्ष रूप से ये संघ पर निशाना था। इसमें कोई दोराय नहीं कि दिल्ली और संघ के बीच रिश्ते अच्छे नहीं हैं लेकिन यूपी के मुख्यमंत्री को संघ का पूरा आशीर्वाद है। एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। अब आने वाले कुछ दिनों में एफआईआर होगी और इसमें गोपाल राव, गिरिजी महाराज और अनिल मिश्रा का नाम आ सकता है। चंपत राय अपनी सेहत का हवाला देकर ट्रस्टी के पद से इस्तीफा दे सकते हैं। उनके खास टिन्नू यादव भी लपेटे में आ सकते हैं। फिलहाल सबकी नजर अब एफआईआर पर है और उसके बाद दिल्ली और लखनऊ की दूरियां और बढ़ेंगी या कम होगी ये भी देखने वाली बात है। जय हिंद