चुनावी मौसम में रंगों पर भी राजनीति
चुनावी मौसम में कोई भी राजनीतिक दल ऐसा नहीं है जो हर मुद्दे पर राजनीति करके सबका भला बनना चाहता हो। १४ अप्रैल को बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर की जयंती पर इस बार जितने कार्यक्रम हुए इतने कभी नहीं हुए। सभी दल बाबा साहेब की जयंती में सुबह से शाम तक लगे रहे। गांव से लेकर शहर तक और बूथ स्तर तक कार्यक्रम हुए समाजवादी पार्टी पीडीए को लेकर कुछ ज्यादा ही सक्रिय है और १४ अप्रैल को इसके नजारे भी दिखाई दिये। हमेशा लाल अंगोछा पहनने वाले सपाई नीले रंग के अंगोछे में दिखाई दिये। राष्टï्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव भी नीले रंग के अंगोछे में थे। बस फिर क्या था बसपा प्रमुख मायावती अखिलेश यादव पर भडक़ गई। उन्होंने कहा कि नीला रंग उनका है अखिलेश यादव ने कैसे इस रंग का अंगोछा पहन लिया। एक अजीब राजनीति हो रही है। रंगों में भी बंटवारा हो गया है। इस पर भी वोट की राजनीति हावी हो गई। आखिरकार नीले रंग पर मायावती का कैसे कब्जा हो गया। क्या उन्होंने इस रंग का पेटेंट करा लिया है और अखिलेश यादव को क्या जरूरत थी कि वो दिखावे के लिए नीला अंगोछा पहनकर आये। क्या अंगोछा पहनने से किसी समाज का वोट लिया जा सकता है? क्या रंग के सहारे किसी को अपना बनाया जा सकता है? 14 अप्रैल को कुछ इसी तरह की राजनीतिक तस्वीर सामने आयी जिससे स्पष्टï था कि ये राजनीतिक दल केवल और केवल चुनावी मौसम में ही इस तरह की राजनीति करते हैं। रंगों से नहीं आत्मा से समाज के साथ खड़ा होना चाहिए। लेकिन एक अजीब तस्वीर बन गई है। छोटे से लेकर बड़े नेता जहां-जहां चुनावी मंचों पर जाते हैं वहां की वेशभूषा अपना लेते हैं। वेशभूषा अपनाने से क्या उनकी सोच बदल जाएगी ये बड़ा सवाल है। क्या अंगोछे का कलर बदलने से समाज उनके साथ चला जाएगा ये बड़ा सवाल है। क्या मायावती का ही नीले रंग पर अधिकार है, ये कैसी बात है। रंगों से ऊपर उठकर हकीकत में दबे-कुचले समाज के साथ राजनेताओं को खड़ा होना चाहिए। चुनावी मौसम के दौरान रंग बदलना नहीं चाहिए। हालांकि राजनेताओं के लिए तो ये मिसाल है कि जैसा हाव-भाव देखते हैं उसी रंग में वो ढल जाते हैं। बहरहाल, ना मायावती का हक नीले रंग पर है और ना ही अंगोछे का रंग बदलने से समाजवादी पार्टी के प्रमुख दबे-कुचले लोगों के मसीहा बन जाएंगे। राजनीति खुले मन से हो तब बात बनेगी। आज का समाज जागरूक हो गया है और उसे ये पता है कि रंग बदलने से कुछ नहीं होगा मन बदलना चाहिए। जय हिंद