यूपी विधानसभा चुनाव
यूजीसी को लेकर भाजपा ने सोचा भी नहीं होगा कि ये उसके लिए गले की फांस बन जाएगी। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले यूजीसी को लेकर भाजपा ने कोई बड़ा फैसला नहीं लिया तो स्थिति भयंकर हो सकती है। हालांकि मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है लेकिन यूजीसी का असर दिखाई देने लगा है यूपी के प्रभारी विनोद तावड़े भी यूजीसी को लेकर क्या स्थिति है दिल्ली को अवगत करा चुके हैं। दरअसल, विधान परिषद चुनाव में यूजीसी का असर पूरा दिखाई दिया। हजारों बैलेट पेपर पर शिक्षित मतदाताओं ने लिखा है कि पहले यूजीसी पर तस्वीर स्पष्टï करें। ये एक दो बैलेट पेपर नहीं बल्कि हजारों बैलेट पेपर लिखा गया है इसलिए अब भाजपा यूपी विधानसभा चुनाव से पहले यूजीसी को लेकर कोई बड़ी घोषणा कर सकती है। हालांकि यूजीसी भाजपा के लिए गर्म दूध बन गया है। अगर बड़ी जातियों को खुश करने के लिए कोई फैसला लेगी तो फिर ओबीसी और दलित उससे एकदम छटक जाएंगे। दरअसल, यूजीसी में जो सैक्शन-3 -1-5 जो है उसको लेकर सबसे ज्यादा एतराज है जिसे 13 अक्टूबर को लागू कर दिया गया। भाजपा की हर मीटिंग शीर्ष नेतृत्व से एक ही सवाल हो रहा है कि 13 जनवरी 2026 को यूजीसी क्यों लागू किया गया। कम से कम पहले इसकी समीक्षा करनी चाहिए थी। भाजपा के कार्यक्रमों में भी अब यूजीसी को लेकर नेताओं से सवाल होने लगे हैं। भाजपा के नेता भी यूजीसी को लेकर अंदरखाने बंट चुके हैं। वैसे भी भाजपा की जब स्थापना हुई थी तब ब्राह्मïण, ठाकुर और वैश्य समाज के लोग ही उससे जुड़े थे जनसंघ से पं. दीनदयाल उपाध्याय, श्यामाप्रसाद मुखर्जी जैसे नेता भाजपा में आये थे। अब जिस तरह से यूजीसी जिन्न बैलेट पेपर से निकला है उससे ये बात सिद्घ है कि ये जिन्न बांटेगा भी और काटेगा भी। क्योंकि एमएलसी रिजल्ट सबके सामने है और मिसाल है कि एक चावल से ही पता चल जाता है कि हांडी पक गई है। ये अहसास भाजपा को एमएलसी चुनाव में करा दिया गया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार विधानसभा चुनाव की घोषणा से पहले यूजीसी पर कोई बड़ा फैसला आ सकता है लेकिन जो भी फैसला आयेगा वो भाजपा के लिए एक तरफ खाई और एक तरफ कुए वाला होगा। यूजीसी का सबसे ज्यादा प्रभाव उत्तर प्रदेश में ही दिखाई दे रहा है और विधानसभा चुनाव २०२७ यूजीसी का जिन्न भाजपा के लिए जरूर खतरे की घंटी है। जय हिंद