अच्छा संकेत नहीं है
संवैधानिक पदों पर अगर सवाल उठने लगे तो फिर सिस्टम पर सवाल होते हैं और जब सिस्टम पर सवाल होते हैँ तो फिर लोकतंत्र पर सवाल होते हैं। लोकतंत्र पर सवाल होते हैं तो फिर नैतिकता पर सवाल होते हैं और बात जब नैतिकता पर आती है तो फिर भरोसे पर सवाल उठता है। कुछ ऐसी ही तस्वीर आजकल देश में दिखाई दे रही है। हालांकि अब नैतिकता की बात तो गुजरे जमाने की बात हो गई। भरोसे के साथ अब नैतिकता भी कहीं दिखाई नहीं देती। कुछ समय से कभी न्यायपालिका पर, कभी मीडिया पर, कभी चुनाव आयोग पर ऐसे संवैधानिक पदों पर सवाल उठ रहे हैं जो लोकतंत्र के स्तंभ है। हम जीत का जश्न मना सकते हैं, सत्ता का नशा ले सकते हैं लेकिन क्या वास्तव में हमें जीत का जश्न मनाना चाहिए। क्या वास्तव में सत्ता का नशा लेना चाहिए। ये बड़ा सवाल है। पिछले कुछ दिनों से चुनाव आयोग को लेकर बड़े सवाल खड़े किये जा रहे हैं। हालांकि कुछ घटनाएं ऐसी हुई हैं जिनको लेकर विपक्ष आयोग पर सवाल उठा रहा है। ये बात सही है कि आयोग एक निष्पक्ष और स्वतंत्र संस्था है लेकिन कहीं ना कहीं उसकी नियुक्ति में सरकार का आशीर्वाद रहता है इसलिए निष्पक्ष होना एक बड़ी चुनौती है। अभी सुप्रीम कोर्ट ने भी चुनाव आयोग की नियुक्ति को लेकर जिस तरह अलग-अलग जजों की राय आयी वो भी सबके सामने है। इसमें कोई दोराय नहीं टीएन शेशन जब मुख्य चुनाव आयुक्त थे तब उन्होंने चुनाव आयोग की ताकत का अहसास कराया। वरना, कई दशक पहले चुनाव आयेग एक कठपुतली की तरह काम करता था। लेकिन शेशन ने अहसास कराया कि चुनाव आयोग कितना पावरफुल है और देश के लिए उसकी क्या भूमिका है लेकिन अब जिस तरह से सवाल उठ रहे हैं वो ठीक नहीं है। ये बात सही है कि चुनाव आयोग स्वतंत्र संस्था है लेकिन क्या वो स्वतंत्र रूप से काम कर रहा है ये बड़ा वाल है। यही कारण है कि अभी हाल ही में चुनाव आयोग ने बकायदा मीडिया से बात करते हुए अपने आप को निष्पक्ष बताया और भेदभाव के जो आरोप लग रहे थे उस पर खुलकर बात की। ऐसी क्या जरूरत थी कि चुनाव आयोग को ये बताना पड़ा कि वो निष्पक्ष और भेदभाव नहीं करता लेकिन ये सवाल क्यों उठे ये भी बड़ा सवाल है। वास्तव में लोकतंत्र के स्तंभ अगर स्वतंत्र होकर, निष्पक्ष होकर अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे तो देश और तरक्की करेगा। बहरहाल, सवाल उठना ठीक नहीं है, निष्पक्षता के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाना चाहिए सरकारें आती-जाती रहती है। इस बात को ध्यान में रखकर अपनी जिम्मेदारी निभाना चाहिए। इसमें कोई दोराय नहीं चुनाव आयोग निष्पक्ष संस्था है और उसको ये साबित भी करना पड़ेगा। जय हिंद