नई दिल्ली (युग करवट)। मतदाता सूची के एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग के अंदर कथित मतभेद की रिपोर्ट सामने आने के बाद अब आयोग ने सफाई दी है। कहा गया है कि चुनाव आयुक्त किसी मुद्दे पर विचार के दौरान सवाल उठा सकते हैं, स्पष्टीकरण मांग सकते हैं या अपनी टिप्पणी दे सकते हैं। लेकिन ऐसी टिप्पणी को औपचारिक असहमति यानी डिसेंट नहीं माना जा सकता। एसआईआर से जुड़े मुद्दों पर दोनों चुनाव आयुक्तों ने टिप्पणियां की थीं। इन पर फैसले से पहले विचार भी किया गया। लेकिन किसी भी चुनाव आयुक्त ने अंतिम फैसले के खिलाफ औपचारिक डिसेंट दर्ज नहीं कराया। आयोग के मुताबिक, जिन आदेशों को लेकर सवाल उठ रहे हैं, उन पर तीनों सदस्यों के हस्ताक्षर हैं।
चुनाव आयोग के मुताबिक, किसी मामले पर चर्चा के दौरान आयुक्त का सवाल उठाना या अपनी राय रखना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। तीन सदस्यीय आयोग में सभी चुनाव आयुक्तों की बराबर भूमिका होती है। अगर किसी मुद्दे पर मतभेद हो तो बहुमत की राय के आधार पर फैसला होता है।