विधानसभा चुनाव २०२७
भाजपा के राष्टï्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दो दिवसीय दौरे के बाद वापस लौट गये। इस बीच उन्होंने इनडायरेक्ट कई संदेश दे दिये। उन्होंने ये भी अहसास करा दिया कि अब नेताओं की परिक्रमा या लंबे-चौड़े स्वागत समारोह से पार्टी का टिकट नहीं मिलता। नितिन नबीन ने जिस तरह पुराने कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से संवाद किया उसका सीधा संकेत है कि जो पुराने लोग रहे हैं उनके अनुभव का पार्टी सहयोग लेना चाहती है। गाजियाबाद में महानगर अध्यक्ष मयंक गोयल ने जिस तरह एक बड़ा स्वागत करके एक मजबूत संदेश दिया हालंाकि गाजियाबाद में एक जगह और स्वागत की तैयारी थी लेकिन राष्टï्रीय अध्यक्ष गाड़ी से नहीं उतरे और वो महानगर अध्यक्ष द्वारा आयोजित स्वागत स्थल पर रूके ही नहीं बल्कि उन्होंने संबोधन भी किया और स्वागत से गद्गद् भी रहे क्योंकि ये स्वागत एक संगठन की ओर से था। ये सीधा संकेत था कि संगठन सर्वोपरि है। गाजियाबाद के बाद वो सीधे मेरठ सुभारती पहुंचे और वहां पर युवाओं और कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद किया। फिर वो सहारनपुर के लिए रवाना हुए। इस बीच मेरठ में कई जगह बड़े स्वागत की तैयारी थी। भाजपा के बड़े नेता लंबी-चौड़ी तैयारी के साथ राष्टï्रीय अध्यक्ष का इंतजार कर रहे थे लेकिन राष्टï्रीय अध्यक्ष नहीं रूके और सारी तैयारी धरी रह गई और वो सीधे सहारनपुर पहुंच गये। सहारनपुर में भी भाजपा के विधायक ने भी उनके स्वागत की तैयारी की थी लेकिन यहां भी नितिन नबीन नहीं रूके और सीधे जहां कार्यक्रम था वहीं पहुंचे। इस बात से साफ संकेत थे कि परिक्रमा और स्वागत से अब बात बनने वाली नहीं है। जो जमीनी नेता होगा और आम लोगों के बीच उसकी अच्छी छवि होगी इस बार पार्टी उसे मौका देगी। जो लंबी-चौड़ी भीड़ लाकर विधायक सांसद, मंत्री या और अन्य नेता स्वागत करके अपने नंबर बढ़ाना चाहते हैं अब ऐसे लोग शायद नई व्यवस्था में फिट ना बैठे। वैसे भी उत्तर प्रदेश के प्रभारी बने विनोद तावड़े पहले ही ऐसे लोगों को चेतावनी दे चुके हैं जो बड़े-बड़े होर्र्डिंग्स लगाकर आपको स्वयंभू वरिष्ठ नेता लिखते हैं। बहरहाल नितिन नबीन अपने दो दिवसीय दौरे से किस तरह का अनुभव लेकर गये हैं आने वाले दिनों में पता चलेगा। जय हिंद