ससुर अशोक सिद्घार्थ के इस्तीफे के बाद भी
लखनऊ (युग करवट)। बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने समधी अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास लेने के बाद अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से निकाल दिया। उन्होंने अशोक सिद्धार्थ के इस्तीफे के फैसले को देर से उठाया गया सही कदम बताया। उन्होंने कहा कि यदि अशोक सिद्धार्थ ने पहले ही राजनीति से संन्यास ले लिया होता तो बसपा, बहुजन समाज और बहुजन मूवमेंट के साथ-साथ आकाश आनंद को भी विपरीत परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ता।
मायावती ने कहा कि अशोक सिद्धार्थ का राजनीति से संन्यास लेना देर आए, दुरुस्त आए की तरह अच्छी बात है। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि अशोक सिद्धार्थ की नीयत और अभिलाषा अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। मायावती ने कहा कि अगर अशोक सिद्धार्थ पहले ही यह फैसला ले लेते तो उन्हें विधानसभा चुनाव और खासकर उत्तर प्रदेश में पांचवीं बार सरकार बनाने की तैयारियों के बीच पार्टी और मूवमेंट के व्यापक हित में उनके बारे में कई बार कड़े फैसले लेने की जरूरत नहीं पड़ती। बसपा की अंबेडकरवादी राजनीति की पहचान त्याग, तपस्या, संघर्ष और कुर्बानी के साथ-साथ निजी और पारिवारिक स्वार्थ से दूर रहने की रही है। मायावती ने कहा कि पार्टी के सभी लोगों को बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर और कांशीराम के आदर्शों से सीख लेते हुए निजी और पारिवारिक स्वार्थ तथा पद की लालसा से ऊपर उठना चाहिए। तभी बहुजन समाज शासक वर्ग बन सकेगा। जितना महान लक्ष्य होता है, उतनी ही बड़ी कुर्बानी की जरूरत होती है। मायावती ने आकाश आनंद के रवैये पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि आकाश आनंद ने उनके सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर अशोक सिद्धार्थ से संबंधित पोस्ट को रिपोस्ट करना उचित नहीं समझा, जबकि वह पोस्ट उनके ही सकारात्मक और भलाई के लिए थी।
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