नीट परीक्षा लीक बड़ा मुद्दा बन गया, कॉकरोच जनता पार्टी का जंतर मंतर पर आंदोलन भी हो गया, संसद मार्च भी हो गया, लाठीचार्ज भी देख लिया और पुलिस के जवानों पर हमला भी देखा, वांगचुक का अनशन भी देखा और उसको समाप्त होते भी देखा, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी देख लिया और कॉकरोचों की होटल पार्टी भी देख ली। उसके बाद संसद में हंगामा देखा। मानसून सत्र के अब तक सारे दिन दोनों सदनों की स्थगित होती कार्रवाई भी देख ली। इतना सब देखने के बाद मन में बात आती है कि आखिर राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर अब कोई बात क्यों नहीं कर रहा है। हालांकि शुक्रवार को सांकेतिक ही सही निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने साधू का वेश बनाकर चढ़ावा चोरी के मामले की ओर ध्यान आकर्षित करने की कोशिश तो की। अन्यथा कॉकरोच आंदोलन के तले चढ़ावा चोरी के मामले की आवाज दब ही गई है। अब सरकार या पुलिस की ओर से नहीं बताया जा रहा है कि चढ़ावा चोरी मामले की जांच कहां तक पहुंची? आरोपियों की रिमांड पर क्या-क्या हुआ? क्या कुछ नया मामला सामने आया? चंपत राय के बारे में भी बातचीत पूरी तरह से बंद हो गई है। जो लोग कुछ समय पहले तक चंपत राय पर कार्रवाई की बात करते थे आज वह कॉकरोच के आंदोलन पर चर्चा में व्यस्त हैं। सोचकर बताइएगा कि क्या राम मंदिर से चढ़ावा चोरी का मामला कॉकरोच के आंदोलन से इतना कमतर था कि इस पर चर्चा ही बंद कर दी जाए? इतना तो तय है कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले में बात बंद हो जाने से भाजपा और सरकार तो कम से कम शांति में होगी और सोच रही होगी कि अच्छा हुआ जो कॉकरोच जंतर मंतर पर आकर बैठ गए, लोगों ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी को लेकर चर्चा तो बंद की। वरना इस मामले पर ना भाजपा के पास कोई जवाब था ना सरकार के पास। वैसे जवाब तो उनके पास आज भी नहीं होगा। मगर इतना तो दोनों को बताना पड़ेगा कि क्या चढ़ावा चारी मामले में छोटी मछलियां ही गिरफ्तार होंगी, असली सूत्रधार भी पुलिस के हत्थे चढ़ेंगे। या फिर कॉकरोच के आंदोलन की आड़ में चढ़ावा चोरी के मामले को ही समाप्त मान लिया गया।