-शोभा भारती-
गाजियाबाद (युग करवट)। इस साल की कांवड़ यात्रा आधी-अधूरी तैयारियों के बीच चलेगी। कारण दो बार कार्य पूरा करने की डेडलाइन दिए जाने के बाद भी कांवड़ मार्ग पूरी तरह से यात्रा के लिए तैयार नहीं हो सका है। अभी भी जगह-जगह सडक़ों में गड्डे हैं तो वहीं सडक़ किनारे कीचड और गंदे पानी से लबाबब हैं। जबकि दूरदराज के कांवडिय़ों का दिल्ली-मेरठ रोड पर आना शुरू हो गया है। कल से श्रावण मास शुरू होने के बाद दिल्ली, गुरूग्राम, ग्रेटर नोएडा, दादरी आदि शहरों के कांवडिय़ों का आना शुरू हो जाएगा। सम्भावना है कि आने वाले एक दो दिन मेरठ रोड पर कांवडिय़ां ही दिखाई दें। ऐसे में इन शिवभक्तों की यात्रा अधिकारियों की लापरवाही के कारण गंदगी के बीच होकर गुजरेगी। ऐसा नहीं है कि कांवड़ मार्ग पर काम नहीं चल रहा है, लेकिन काम की जो रफ्तार है, उससे नहीं लगता कि काम समय से पूरा होगा। डीएम रविन्द्र कुमार मांदड़ ने दिल्ली कांवड़ मार्ग पर पहले 25 जुलाई और फिर 28 जुलाई तक काम पूरा करने के निर्देश दिए थे। लेकिन यह निर्देश भी अधिकारियों में फुर्ती नहीं ला सके। मार्ग पर लग रहे कई शिविरों के पास भी गंदगी और कीचड़ जमा है जिससे वह खुद ही अपने स्तर से सफाई कराने में जुटे हैं। जिसे लेकर शिविर संचालकों में भी नाराजगी दिखाई दे रही है। छह अगस्त से रूट डायवर्ट हो जाएगा।
गड्डे, कीचड़ और जलभराव से अटी हैं सडक़ें
दिल्ली-मेरठ मार्ग पर अभी भी गंदगी, कीचड़ से सडक़े अटी हुई हैं। जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हुए हैं जिन्हें अभी तक साफ नहीं किया गया है। बारिश के कारण सडक़ों पर पानी जमा है जिससे वहां मच्छर आदि पनप रहे हैं। कई जगह तो हालात इतने बदतर है कि सडक़ टूटी होने से वहां अच्छा-खासा कीचड जमा हो गया है। लेकिन अभी तक इस गंदगी को साफ करने के लिए कोई अभियान शुरू नहीं किया गया है। जबकि कांवडियों को मार्ग में आना शुरू हो गया है।
नालों की नहीं हुई सफाई, बेरिकेट्स से किया कवर
कांवड़ मार्ग में पडऩे वाले नाले अभी भी गंदगी से अटे हुए हैं। लेकिन इन नालों की सफाई के बजाए उन्हें लकड़ी के तख्त लगाकर कवर करने का प्रयास किया गया है।
इतना ही नहीं नालों तक लोग न पहुंच सके इसके लिए उन्हें लकड़ी की बेरिकेट्स लगाकर कवर किया गया है। लेकिन सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि सावन महीना बारिश का मौसम है, ऐसे में बारिश होने पर नाले पानी के कारण ओवर फ्लो होंगे और नालों की गंदगी सडक़ों पर पहुंचेगी। लेकिन खानापूर्ति करते हुए इन नालों को बेरिकेट्स से कवर किया जा रहा है। जिससे शिवभक्तों को बारिश के दिनों में काफी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
अभी भी चल रही है पेड़ों की कटाई का काम
बारिश के कारण कांवड़ मार्ग पर बड़े पैमाने पर झाडियां उग आई हैं तो वहीं पेड़ों की टहनियां भी बढ़ गई हैं। वनविभाग और नगर निगम की टीमें पेड़ों की कटाई में जुटी हुई है। हालांकि नालों के किनारे बड़े पैमाने पर झाडिय़ां उगी हुई हैं जिन्हें काटने के बजाए उन्हें बेरिकेट्स लगाकर कवर करने का प्रयास किया जा रहा है।
जहां-जहां पेड़ों की टहनिया अधिक नीचे लटक रही हैं, उन्हें काटने का काम किया जा रहा है। लेकिन काम की रफ्तार अभी भी धीमी है। बरसात के मौसम में सडक़ किनारे इन झाडिय़ों से जीव-जंतु बाहर निकल सकते हैं जिससे हादसे होने की आशंका बनी रहती है।
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दूरदराज के कांवडिय़ों का दिल्ली-मेरठ रोड पर आना शुरू
शिवरात्रि के जलाभिषेक में अभी दस दिन का समय बाकी है। लेकिन दूरदराज के राज्यों के कांवडिय़ों का हरियाणा से गंगाजल लेकर लौटना शुरू हो गया है। कांवड़ मार्ग पर विश्राम कर रहे राजस्थान के कांवडिय़ों ने बताया कि यह उनकी आठवीं कांवड़ है। 22 जुलाई से उन्होंने अपनी यात्रा शुरू की थी, शिवरात्रि तक अपने शहर पहुंच जाएंगे। फरीदाबाद के कांवडिय़ां नरेश ने बताया कि वह हर साल कांवड़ लेकर निकलते हैं। बिना कोई मन्नत के वह अपने दोस्तों के साथ कांवड़ लेकर आ रहे हैं। इस साल भी वह कांवड़ लेकर आ रहे हैं। वहीं गुरूग्राम के कांवडिय़ा 21 लीटर जल की कांवड़ लेकर आ रहे हैं। मौसम की परवाह न करते हुए यह कांवडियां शिवभक्ति में लीन होकर अपनी कांवड़ लेकर अपने शहरों की ओर जा रहे हैं। हालंाकि अभी कांवडिय़ों की संख्या कम है लेकिन आने वाले दिनों में दिल्ली-मेरठ मार्ग पूरी तरह से भगवामय नजर आएगा।
होर्डिंग के जरिए बढ़ा जा रहा है शिवभक्तों का हौंसला
दिल्ली-मेरठ रोड पर लाखों की संख्या में कांवडिय़ां आते हैं। जो हरिद्वार, गौमुख आदि से जल लेकर अपने गंतव्य की ओर निकलते हैं। ऐसे में कांवडिय़ों का हौंसला बढ़ाने के लिए जगह-जगह उत्तर प्रदेश सूचना विभाग व जिला प्रशासन, नगर निगम द्वारा होर्डिंग आदि लगाए जा रहे हैं। इन होर्डिंग में देश के प्रधानमंत्री व प्रदेश के मुख्यमंत्री की फोटो लगाई गई है व कांवड यात्रा को समरसता का पर्व बाते हुए कांविडय़ों का स्वागत का संदेश अंकित हैं। इसके अलावा जिला प्रशासन द्वारा लगाए होर्डिंग में ‘भोले की भक्ति-सबसे बड़ी शक्ति’ का संदेश दिया गया है। तो वहीं नगर निगम द्वारा भी कांवड़ यात्रा को प्लास्टिक फ्री, स्वच्छता पूर्ण यात्रा बनाए जाने का संदेश दिया जा रहा है। पूरे कांवड़ यात्रा मार्ग में जगह-जगह इस तरह के होर्डिंग लगाए गए हैं। समाजसेवी व राजनैतिक लोगों द्वारा भी होर्डिंग लगाकर कांवडिय़ों का स्वागत संदेश दिया जा रहा है।जगह-जगह लग रहे हैं शिविर
दिल्ली-मेरठ रोड पर लाखों की संख्या में कांवडिय़ा निकलते हैं। कांवडिय़ों के विश्राम से लेकर उनके खाने-पीने की व्यवस्था समाजसेवी संगठन शिविर लगाकर करते हैं। हालांकि अभी कांवडिय़ों की संख्या कम है लेकिन कांवड़ मार्ग पर शिविर लगाने का काम शुरू हो गया है। महज पांच सौ मीटर के दायरे में अभी तक आधा दर्जन से अधिक शिविर लगाने का काम किया जा रहा है। आंकड़ों की मानें तो पूरे दिल्ली-मेरठ रोड पर दो सौ के करीब शिविर लगाएं जाएंगे जो मोदीनगर बार्डर से यूपी बॉर्डर तक लगेंगे। शिविरों को सिंगल विंडो सिस्टम के जरिए एनओसी दी जा रही है साथ ही शिविर संचालकों को मानकों का पालन करने की हिदायत भी दी गई है।