सडक़ से संसद तक आंदोलन
सडक़ से लेकर संसद तक पेपर लीक को लेकर जो आंदोलन हो रहा था उसको सरकार ने खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गंभीरता से लिया। ऐसा पहली बार हुआ जब कुछ ही सप्ताह फॉलोअर के आधार पर बनी कॉकरोच पार्टी से सरकार बातचीत को तैयार हो गई। दरअसल, इससे पहले भी किसानों ने बड़ा आंदोलन किया था लेकिन सरकार ने कोई बात नहीं की थी। किसानों को अन्नदाता कहा जाता है फिर सरकार की ओर से बातचीत के कोई सकरात्मक प्रयास नहीं किये गये और अब फिर आंदोलन की तैयारी थी जो टल गया। लेकिन पेपर लीक को लेकर जिस तरह से माहौल बना सरकार इस बात को समझ गई थी कि ये आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है। हालांकि प्रदर्शन के नाम पर अराजकता भी हुई। मैने इसी कॉलम में लिखा था कि प्रदर्शन की आड़ में कुछ नकारात्मक शक्तियां और असामाजिक तत्व देश की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं। इस बात को आज सीजेपी के प्रमुख दीपके ने भी माना और कहा कि आंदोलन असामाजिक तत्व घुस गये। दरअसल, सबसे बड़ी विडंबना ये है कि हमारे देश का विपक्ष केवल दूसरों के कंधों पर बंदूक चलाता है। देश की सुरक्षा खतरे में पड़े उससे उसको कुछ लेना-देना नहीं और तीन दिन में दिल्ली में जो तस्वीर दिखाई दी वो सभी के सामने है। वैसे भी हमारे देश की राजनीति मुद्दों से हटकर हो रही है और इसके लिए सत्ता और विपक्ष दोनों जिम्मेदार है। देश में जबसे मोदी सरकार आयी है तब से बहुत कुछ बदलाव आया है इसमें कोई दोराय नहीं है और लोगों की जुबान पर एक शब्द आता है मोदी है तो मुमकिन है और अब वही हुआ प्रधानमंत्री नरेंद्र ने तीन दिन से पेपर लीक मामले पर अलग-अलग बैठकें की और उसमें कुछ प्रयास शुरू किये। फास्ट टै्रक अदालतें बना दी गई। शिक्षा सचिव का इस्तीफा हो गया। सरकार के शुरूआती इन प्रयासों का स्वागत करना चाहिए और सरकार पर भरोसा करना चाहिए कि आगे जो भी मांगे हैं उन पर सकारात्मक विचार होगा। क्योंकि हंगामों से, तोड़-फोड़ से देश की सम्पत्ति को ही नुकसान होता है, आम आदमी को ही नुकसान होता है, दिल्ली में तीन दिन से स्थिति ठीक नहीं है, जाम से लोग जूझ रहे हैं, मेट्रो स्टेशन बंद कर दिये गये हैं आखिरकार इससे आमजनता ही परेशान हो रही है। नेता चाहे सत्ता पक्ष के हों या विपक्ष के हों वो एसी में रहते हैं लग्जरी गाडिय़ों में चलते हैं और भुगतना आम आदमी को पड़ा है इसलिए इसका भी ख्याल रखना सभी की जिम्मेदारी है। जय हिंद