एक म्यान में दो तलवारें- क्या दिखायेंगी असर
गाजियाबाद (युग करवट)। राष्टï्रीय लोकदल में जब पूर्व सांसद केसी त्यागी शामिल हुए थे तभी ये चर्चा चलने लगी थी कि एक म्यान में दो तलवारें कैसे रहेंगी। दरअसल रालोद में कई दशकों से त्रिलोक त्यागी विभिन्न पदों पर रहकर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं और आज भी वो संगठन के प्रधान महासचिव हैं। जिस समय केसी त्यागी रालोद में आये थे तब युग करवट ने त्रिलोक त्यागी से सवाल किया था कि एक म्यान में दो तलवारें कैसे रहेंगी। उन्होंने कहा था कि ऐसा कुछ नहीं है। केसी त्यागी हमारे रिश्तेदार है और हम रिश्तेदार का भव्य स्वागत करेंगे। केसी त्यागी के ज्वाइनिंग समारोह में त्रिलोक त्यागी मंचासीन भी रहे। लेकिन कुछ दिनों से जो रालोद के कार्यक्रम हो रहे हैं जिसमें केसी त्यागी जा रहे हैं उन कार्यक्रमों में त्रिलोक त्यागी कहीं दिखाई नहीं दे रहे हैं। केसी त्यागी को रालोद में वो पद मिला है जो आज तक किसी को भी नहीं मिला है। उन्हें रालोद संसदीय दल का अध्यक्ष चुना गया है और पार्टी के अध्यक्ष जयंत चौधरी उसके साधारण सदस्य हैं। राजनीति में ऐसा पहली बार हुआ है जब कोई पार्टी का अध्यक्ष सदस्य बना हो। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि रालोद में केसी त्यागी की क्या हैसियत है और उनका कद कितना बड़ा है। हालांकि त्रिलोक त्यागी की बात करें तो रालोद में वो एक मजबूत स्तंभ के तौर पर खड़े हैं। इतना ही नहीं उनकी संगठन में बहुत मजबूत पकड़ है। अभी एक साल से जिस तरह उन्होंने देश के दौरे किए, प्रदेश के दौरे किये, पार्टी के सम्मेलन हुए, उन्होंने संगठन को मजबूती प्रदान करने में अहम भूमिका निभाई। उनका ये भी कहना है कि उनका काम संगठन बढ़ाना और जयंत चौधरी के हाथ मजबूत करना है। वो इसी मिशन पर काम कर रहे हैं। लेकिन कहीं ना कहीं पार्टी के अंदर इस बात की चर्चा भी चल रही है कि पार्टी के ही कार्यक्रमों में दोनों बड़े नेता केसी त्यागी और त्रिलोक त्यागी एक साथ मंच पर दिखाई नहीं दे रहे हैं। जाहिर है राजनीति में जो कुछ दिखाई देता है वो चर्चा का विषय जरूर बन जाता है। भले ही कितना ही ये कहा जाए कि सबकुछ ठीक है लेकिन कहीं ना कहीं जो दिखाई दे रहा है उससे यही लगता है कि एक म्यान में दो तलवारें आसानी से नहीं रह पा रही हैं। वैसे भी दोनों तलवारें आज भी धारदार हैं। पांच दशकों से दोनों नेता सक्रिय राजनीति में हैं उसके बाद भी उनकी तलवारों पर कोई जंग नहीं लगा है, वो आज भी वही धार रखती है। त्रिलोक त्यागी के साथ एक मजबूत संगठन खड़ा हैं। वो लगातार संगठन को आगे बढ़ाने के लिए नई-नई नियुक्तियां कर रहे हैं, युवाओं को भी जोड़ रहे हैं और लोग उनके साथ लगातार जुड़ रहे हैं। उनके पास एक मजबूत टीम है। केसी त्यागी क्योंकि एक वरिष्ठ नेता हैं और लंबा अनुभव है। इसका लाभ जयंत चौधरी उठाना चाहते हैं। बहरहाल, २०२७ का विधानसभा चुनाव हो सकता है इसी साल हो जाए। नहीं तो कुछ माह बाद यूपी में चुनाव होना ही है और ये दोनों पार्टी के वरिष्ठ नेता अपने दल को कितनी और मजबूती देंगे ये बड़ा सवाल है। अगर ये दोनों नेता अलग-अलग चलते रहे तो इसका संदेश सही नहीं जाएगा। हालांकि दोनों नेताओं से बात करों तो सभी का यही कहना है कि हम सब साथ हैं लेकिन फिलहाल साथ दिखाई नहीं दे रहे हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि ये दोनों ताकतें एक साथ होकर संगठन को और मजबूत करेंगे।