मुजफ्फरनगर (युग करवट)। ज्ञानवापी प्रकरण में अपने फैसले को लेकर देशभर में चर्चा में रहे जज रवि कुमार दिवाकर एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह उनके हालिया आपराधिक मामलों में दिए गए फैसले हैं। बीते 6 अप्रैल से 6 जुलाई के बीच उन्होंने मुजफ्फरनगर में विभिन्न हत्या के मामलों में 13 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है। लगातार आए इन फैसलों ने न्यायिक हलकों के साथ-साथ आम लोगों के बीच भी चर्चा छेड़ दी है। लगभग तीन महीने की अवधि में अलग-अलग हत्याकांडों में सुनाए गए इन फैसलों को लेकर अभियोजन पक्ष का कहना है कि इससे पीडि़त परिवारों को न्याय मिला है और गंभीर अपराधों के खिलाफ सख्त संदेश गया है। हालांकि, यह भी ध्यान देने योग्य है कि भारतीय न्याय व्यवस्था में मृत्युदंड की सजा अंतिम नहीं होती। ऐसे मामलों में दोषियों को उच्च न्यायालय में अपील का अधिकार होता है और फांसी की सजा पर अमल से पहले उच्च न्यायालय की पुष्टि आवश्यक होती है।