सैंतली गांव के चिराग त्यागी को न्याय दिलाने की मांग पर 14 जून को महापंचायत की गई थी। हम सभी जानते हैं कि पैरा एथलीट चिराग त्यागी की उसी के साथी ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। पीडि़त परिवार का आरोप है हत्याकांड में मंख्य आरोपी का चाचा और भाई भी शामिल थे जिन्हें पुलिस ने गिरफ्तार नहीं किया है। गांव वालों की यह भी आशंका है कि हत्याकांड की साजिश में और लोग या कोई संस्था भी शामिल हो सकती है। महापंचायत में रालोद नेता अमरीश त्यागी ने भी अपनी बात रखी थी। उस दौरान अमरीश त्यागी ने कहा साल 1980 का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि साल 1980 में हुई एक घटना में पीडि़त को न्याय दिलाने के लिए सडक़ पर संघर्ष किया था, प्रशासन नहीं चेता तो उसे दोहराया भी जा सकता है। लोगों में और खासकर युवा वर्ग में चर्चा शुरू हुई कि वर्ष 1980 में ऐसा क्या हुआ था। जो लोग उस साल जवानी में पैर रख चके थे उन्हें वह खौफनाक मंजर याद आ गया। उस साल 18 जून को बागपत के चौराहे पर ईश्वर त्यागी की कार पंक्चर हो गई थी। वह उसे ठीक करा रहे थे और माया त्यागी गाड़ी में ही थीं। तभी दो लोग वहां आए उन्होंने माया के साथ बदतमीजी शुरू कर दी। ईश्वर और उनके दोस्तों ने उन्हें पीटकर भगा दिया। उसके बाद वहां सब इंस्पेक्टर नरेन्द्र सिंह करीब दस पुलिस वाले हथियार लेकर आ गया और ईश्वर समेत तीनों की गोली मारकर हत्या कर दी। ईश्वर त्यागी की पत्नी माया त्यागी को सरे राह निर्वस्त्र कर पैदल ही थाने लाया गया। थाने में ले जाकर पीटा गया। उनके शरीर पर 25 से ज्यादा चोटों के निशान मिले थे। पुलिस ने अपनी कहानी में बताया कि यह डकैतों के साथ हुई मुठभेड़़ की घटना थी। घटना यह घटना इतिहास में पुलिस की क्रूरता, अमानवीयता, दर्दनाक और काला अध्याय है। इस घटना ने पश्चिम उत्तर प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को अंदर तक हिला दिया था। आक्रोश सडक़ पर था। किसान नेता चौधरी चरण सिंह धरने पर थे। मुलायम सिंह यादव और केसी त्यागी के नेतृत्व में जेलें भरी गईं। अब यह घटना बागपत की नहीं रह गई थी। पूरे देश की चेतना और राजनीति हिल चुकी थी। संसद लेकर सुप्रीम कोर्ट की महिला वकील तक मोर्चा खुल चुका था। तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार जनता के भारी दबाव में आ चुकी थी। जनता की मांग पर सरकार को इस मामले को सीबीसीआईडी को सौंपना पड़ा। अदालत में पुलिस की मुठभेड़ की कहानी झूठी साबित हुई। 11 पुलिस कर्मी दोषी पाए गए उनमें से छह को उम्रकैद हुई। सब इंस्पेक्टर नरेन्द्र सिंह की हत्या हुई। हत्या का आरोप माया के देवर विनोद त्यागी पर लगा। विनोद खुद यूपी पुलिस में सिपाही था। साल 2009 अदालत ने विनोद को र्निदोष मानते हुए बाइज्जत बरी कर दिया। यह घटना पुलिस के उत्पीडऩ के सबसे बड़े उदाहरणों में से एक है। इस घटना को लेकर जो आंदोलन हुआ था उसके नेतृत्वकर्ताओं में केसी त्यागी भी थे। जो आज एक स्थापित राष्टï्रीय नेता हैं, और अमरीश त्यागी उनके पुत्र हैं, जो वर्तमान में रालोद के नेता हैं। इसलिए सैंतली की महापंचायत में अमरीश ने बिना किसी का नाम लिए परोक्ष रूप से माया त्यागी कांड के आंदोलन की प्रशासन को याद दिलाई थी। जो लोग 1980 में होश संभाल चुके थे वह आज भी इस घटना को याद करके सिहर उठते हैं।