आखिरकार क्यों छोड़ रहे हैं पार्टी
पश्चिम बंगाल में ममता की टीएमसी में टूट हुई उसके अधिकतर सांसद नया दल बनाकर भाजपा के साथ आ गये। कई और राज्यों में भी यही तस्वीर दिखाई दी। उद्घव ठाकरे के कार्यकाल में चौथी बार शिवसेना में टूट हुई। नौ में से छह सांसद शिवसेना शिंदे में शामिल हो गये। विलय की औपचारिकताएं पूरी हो गई। क्षेत्रीय दलों में टूट को लेकर विपक्ष सत्तारूढ़ दल पर हमलावर हो गया। कह रहा है कि लोकतंत्र की हत्या हो रही है। दूसरे दलों को तोडऩा ठीक नहीं है। ईडी और सीबीआई का भय दिखाकर तोडफ़ोड़ हो रही है। योगी सरकार के मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने यूपी के सबसे बड़े विपक्षी दल और देश की तीसरी बड़ी पार्टी समाजवादी पार्टी में टूट का बयान देकर खलबली मचा दी। इतना ही नहीं सपा के संस्थापक सदस्य रामगोपाल यादव और अमित शाह की मुलाकात और चिट्ठी दिये जाने का भी दावा कर दिया। दरअसल, हमाम में सब नंगे हैं इसमें कोई दोराय नहीं है। दो दशकों से राजनीति में जितनी गिरावट आयी है इतनी किसी क्षेत्र में नहीं आयी है। जनता का सेवा करने वाले राजनीतिक दल केवल और केवल घोटाले और लूटमार में ही लगे रहे। अब जो पार्टी छोड़ रहे हैं, भाजपा का दामन थाम रहे हैं उसके पीछे सबसे बड़ा कारण यही है कि उन्होंने अपने जमाने में इतने बड़े कांड किये हैं क्योंकि फाइलें खुली हुई है और हरवक्त उन्हें सपने में जेल दिखाई देती है। इसी वजह से अब भाजपा में जाकर अपने और अपने परिवार की जान बचाना चाहते हैं। ओमप्रकाश राजभर ने स्पष्टï तौर पर कहा कि भाजपा में जाने से उनको कुछ मिलेगा नहीं लेकिन उनकी और उनके परिवार की जान जरूर बच जाएगी। बयान में बिल्कुल दम है, हकीकत यही है। देश की कई बार मुख्यमंत्री रहने वाली मायावती की खामोशी के पीछे भी ये एक बहुत बड़ा कारण है। उनकी फाइलें भी खुली हुई हैं इसलिए उनकी जुबान सिली हुई है। सपा के कई नेता सांसद भी पूरे तरीके से घोटालों में शामिल रहे हैं। यही कारण है कि उनकी बेबाकी भी अब बंद हो गई है। क्योंकि उन्हें सपने में बहुत कुछ दिखाई देता है। विपक्ष जो सत्तापक्ष पर लोकतंत्र की हत्या करने का आरोप लगा रहा है उसको कम से कम अपने गिरेबां में झांकना चाहिए। जय हिंद