भविष्य वही सीखता जो भूतकाल करके जाता है। हमसे पहले के लोग जो कुछ करके गए हम उसी को आगे बढ़ा रहे हैं। आज जो हम कर रहे हैं, आने वाली पीढिय़ा उसी का अनुसरण करेंगी। अगर आज के समय के हम लोग अपने बीत चुके लोगों को भुला देंगे, तो आप लिख कर रख लीजिए कि आने वाली पीढ़ी आपको भी याद नही रखेगी। यह वही गणित है जिसमें कहा जाता है कि जो जैसा बोएगा वह वैसा ही पाएंगा। कांटे बोकर आप फल पा ही नहीं सकते। इन सब बातों में ऐसी कोई बात नहीं है जिसे सामान्य से सामान्य पुरूष जानता ना हो। जानते हम सब हैं बस उसको मानना छोड़ देते हैं। गाजियाबाद में कितने ही लोग ऐसे हैं जो सांसद, विधायक मंत्री, मेयर और दूसरे अन्य जनप्रतिनिधि पद पर रहे हैं। जब उनका समय था तो राजनीति में उनकी तूती बोलती थी। आज उनका समय नहीं है तो वह हाशिए पर हैं। वर्तमान जनप्रतिनिधि उनको सम्मान देने से कतराते हैं। उनकी उपेक्षा करते हैं। जो आज सांसद, विधायक, मंत्री, मेयर आदि जनप्रतिनिधि हैं, भविष्य में सभी पूर्व हो ही जाएंगे। उस समय जब इनको उचित सम्मान नहीं मिलेगा, यह लोग उपेक्षित महसूस करेंगे, तब इनकी समझ में मेरी आज कही हुई बात याद आएगी। हमको यह भी नहीं भूल जाना चाहिए कि गाजियाबाद के पूर्व के जनप्रतिनिधियों ने अपने राजनीति जीवन में बड़ा संघर्ष किया था। कड़े परिश्रम, जनता की लड़ाई के परिणाम ने उन्हें जनप्रतिनिधि बनाया था। आज कितने ही लोग पारिवारिक पृष्ठभूमि की वजह से जनप्रतिनिधि हैं, कितने ही लोग पार्टी के कृपा से जनप्रतिनिधि बने हुए हैं। हमकों पुराने लोगों के संघर्ष को सम्मान देना चाहिए। पुरानी पीढ़ी के योगदान को सम्मानपूर्ण याद रखना चाहिए। अन्यथा भविष्य में जो होगा, वह बहुत पीड़ा देने वाला होगा। आज के नेताओं को चाहिए कि पूर्व के नेताओं को उचित सम्मान दें, क्योंकि आज आप उसी स्थान पर बैठे हैं जहां कल यही लोग बैठे थे।