यूपी-२०२७ विधानसभा चुनाव
गाजियाबाद (युग करवट)। प्रदेश में नौ साल से अधिक भाजपा की सरकार है। २०१७ से लगातार प्रदेश में मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ विराजमान हैं। गाजियाबाद में भी जो २०१७ में विधायक थे वही २०२२ में भी विधायक रहे। बीच में सदर सीट पर अतुल गर्ग के सांसद बनने के बाद उपचुनाव हुआ और भाजपा के टिकट पर संजीव शर्मा चुनाव जीत गये। बाकी सभी वही पुराने जनप्रतिनिधि है जो २०१७ से लगातार विधायक हैं। नौ साल के कार्यकाल में जनप्रतिनिधियों का जो रिपोर्ट कार्ड है उस पर गौर करें तो कोई खास उपलब्धी दिखाई नहीं दे रही है। हालांकि पर संजीव शर्मा का कार्यकाल सबसे कम कार्यकाल चल रहा है। वो २०२४ के बाद उपचुनाव में विधायक बने थे लेकिन अगर उनके कार्य पर गौर करें तो उन्होंने जरूर एक लंबी लकीर खींची है जिसे पार करना अन्य जनप्रतिनिधियों के लिए आसान नहीं है। बाकी सभी विधायक दो बार से विधायक हैं लेकिन उनकी कोई खास उपलब्धी अभी तक सामने नहीं आयी है।
जनता का यही कहना है कि लगातार दो योजना से विधायक चले आ रहे हैं लेकिन अगर उनकी उपलब्धि की बात करें तो फिलहाल कोई बड़ी उपलब्धि सामने नहीं आयी है। यदि कोई बड़ी उपलब्धि है तो वो उसका उल्लेख करे ताकि जनता को भी उसकी जानकारी मिल सके। सूत्रों ने बताया कि पार्टी हाईकमान ने भी इन जनप्रतिनिधियों का गोपनीय सर्वे कराया है और जनता में उनकी क्या स्थिति है इसकी जानकारी भी इकट्ठा कराई है। साथ ही इनका रिपोर्ट कार्ड कैसा है इसका भी सर्वे प्राइवेट एजेंसी से कराया जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि पांच स्तर पर पार्टी हाईकमान सर्वे करा रही है। इसमें तीन सर्वे हो चुके हैं और उसमें कोई खास उपलब्धि दिखाई नहीं दे रही है। आने वाले कुछ माह में दो और सर्वे कराये जाने की चर्चा है। उसके बाद ही २०२७ के विधानसभा के चुनाव में किसको टिकट मिलेगा किसको नहीं मिलेगा इसका फैसला हाईकमान करेगा। सूत्र बताते हैं कि दो जनप्रतिनिधियों की तो रिपोर्ट काफी खराब आयी है। वहीं टिकट के दावेदार अंदरखाने अपनी तैयारी में लग गये हैं। आपको याद होगा कि २०२२ के विधानसभा चुनाव में भी कुछ विधायकों के टिकट कटने की संभावना प्रबल थी लेकिन समाजवादी पार्टी ने जब स्वामी प्रसाद मौर्या, दारा सिंह, ओमप्रकाश राजभर जैसे बड़े नेताओं की एंट्री हो गई तो भाजपा हाईकमान को लगा कि समाजवादी पार्टी भाजपा को जोर का झटका धीरे से दे सकती है इसलिए उन्होंने किसी भी मौजूदा विधायक का टिकट नहीं काटा और २०१७ वाले विधायकों को रिपीट कर दिया। हालांकि सभी विधायक दोबारा जीत भी गये। लेकिन २०२७ की तस्वीर इस बार कुछ अलग है। इसलिए वही चेहरे फिर रिपीट होंगे इसका कोई दावा नहीं कर रहा है।