पीएम की अपील पर करें अमल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पांच राज्यों के चुनाव के बाद देश के लोगों से अपील की है कि वे पेट्रोल-डीजल के इस्तेमाल के लिए थोड़ी सावधानी बरतें, संयम के साथ इस्तेमाल करें, साथ ही सोने-चांदी को लेकर भी उन्होंने कहा कि इतनी खरीददारी ना करें। हालांकि सोने-चांदी की खरीददारी नहीं करने को लेकर स्वर्णकार संघ ने आपत्ति जताई है। चुनाव से पहले सरकार ये दावे कर रही थी कि हमारे पास तेल की कोई कमी नहीं है, देश में कोई संकट नहीं है लेकिन चुनाव के परिणामों के बाद प्रधानमंत्री की अपील अब चर्चा का विषय बनी हुई है। हालांकि भाजपा के बड़े नेताओं ने इस अपील का स्वागत किया है और लोगों से अपील पर अमल करने की बात भी कही है। ठीक है देश में जब संकट आता है तो देशवासियों को एक साथ खड़ा होना चाहिए। लेकिन इसकी शुरूआत अपने घर से होना चाहिए। सभी सरकारी अफसरों को ये कहा जाए कि वो सप्ताह में सरकारी गाडिय़ों का कम इस्तेमाल करें। मंत्रियों के साथ जो गाडिय़ों का काफिला चलता है वो कम कर दिया जाए। देश के मुख्यमंत्रियों के साथ जो पचास गाडिय़ों का काफिला चलता है उसे कम कर दिया जाए और एक दर्जन से कम गाडिय़ों का इस्तेमाल ही मुख्यमंत्रियों के काफिले में हो। इस तरह अगर घर से शुरूआत की जाएगी तो नि:संदेह पेट्रोल डीजल की खपत में बहुत कमी आयेगी। फिर देशवासी भी अपने आप को इस रास्ते पर चलाएंगे, इसमें कोई शक की बात नहीं है। अगर देखा जाए तो एक मुख्यमंत्री के आगमन पर कितना डीजल खर्च होता है इसका अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता। दरअसल, सबसे ज्यादा डीजल-पेट्रोल और सरकारी धन की बर्बादी वीवीआईपी दौरे के दौरान ही होती है। वीवीआईपी दौरे के दौरान खर्च पर गौर करें तो कुछ घंटे के कार्यक्रम पर करोड़ों रुपये खर्च होते हैं ये सब जनता के टैक्स से ही अदा होते हैं। प्रधानमंत्री की अपील नि:संदेह स्वागत योग्य है। मेरा मानना है कि डीजल और पेट्रोल के साथ ही जो और वीवीआईपी आगमन पर सरकारी धन खर्च होता है उस पर भी अंकुश लगाने की जरूरत है ताकि जनता के टैक्स का पैसा वीवीआईपी आगमन के बदले विकास पर लगेगा तो फिर तस्वीर कुछ और होगी। जय हिंद