होर्मुज ब्लॉकेड के बीच उठाया बड़ा कदम
नई दिल्ली (युग करवट)। संयुक्त अरब अमीरात ने घोषणा की है कि वह तेल उत्पादक देशों के समूह ओपेक और ओपेक+ से बाहर हो रहा है। यूएई की सरकारी समाचार एजेंसी के मुताबिक, यूएई 1 मई से ओपेक और ओपेक+ की सदस्यता छोड़ देगा। यूएई के ऊर्जा मंत्री ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा कि यह फैसला ऊर्जा क्षेत्र, पेट्रोलियम सेक्टर और अन्य रणनीतियों की सावधानीपूर्वक समीक्षा के बाद लिया गया है। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि यूएई लंबे समय से ओपेक और ओपेक+ का सदस्य रहा है, लेकिन भविष्य में दुनिया को और ज्यादा ऊर्जा की जरूरत होगी और मांग बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि यूएई को लगा कि यह नीतिगत फैसला लेने का सही समय है। ऊर्जा मंत्री ने यह भी कहा कि होर्मुज स्ट्रेट पर मौजूदा बाधाओं के कारण तेल बाजार पहले से ही अस्थिर है। इसलिए यूएई ने अभी यह फैसला लिया है ताकि बाजार पर बहुत ज्यादा असर न हो।
ईरान युद्ध से पैदा हुए ऐतिहासिक ऊर्जा संकट और वैश्विक अर्थव्यवस्था में बढ़ी अस्थिरता के बीच यह फैसला तेल निर्यातक समूहों और उनके वास्तविक नेता सऊदी अरब के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। ओपेक के पुराने सदस्य यूएई का इस तरह अलग होना समूह में अव्यवस्था पैदा कर सकता है और उसकी ताकत को कमजोर कर सकता है। ओपेक में भू-राजनीति से लेकर उत्पादन कोटा जैसे कई अंदरूनी मतभेद रहे हैं, बावजूद इसके यह समूह एकजुटता दिखाने की कोशिश करता रहा है. लेकिन अब इसके मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। यूएई का ओपेक से बाहर होना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए बड़ी जीत माना जा रहा है. ट्रंप लंबे समय से ओपेक पर आरोप लगाते रहे हैं कि यह संगठन तेल कीमतें बढ़ाकर दुनिया का शोषण करता है।