पश्चिमी बंगाल चुनाव
वैसे तो चार राज्यों में विधानसभा के चुनाव हो रहे हैं। सबसे ज्यादा नजर पश्चिमी बंगाल और उसके बाद असम पर है। असम में दस साल से भाजपा की सरकार है और पश्चिमी बंगाल में दीदी का राज है। इस बार भाजपा के लिए तीन राज्यों के परिणाम से ज्यादा पश्चिमी बंगाल के चुनाव नतीजे पर ज्यादा नजर है। दरअसल पश्चिमी बंगाल का चुनाव उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल है। यूपी में अगले साल २०२७ में चुनाव होना है। अगर पश्चिमी बंगाल में इस बार भी दीदी का परचम लहरा तो फिर यूपी की तस्वीर क्या होगी इसका अंदाजा अच्छे तरीके से लगाया जा सकता है। पहले चरण में ९२ प्रतिशत वोट पड़े इसने सभी को हिला दिया। अगला चरण 29 अप्रैल को होगा। आजादी कीे बाद पहली बार इतना प्रतिशत मतदान हुआ। अब ये मतदान प्रतिशत किसकी तरफ गया इस पर सभी की निगाहें हैं। भाजपा पूरी तरह से जीत के लिए कॉन्फिडेंस के साथ आगे बढ़ रही है। कल प्रधानमंत्री ने प्रचार के अंतिम दिन आयोजित सभा में कहा कि वो शपथ ग्रहण समारोह में चार तारीख के बाद आएंगे। ये कॉन्फिडेंस बहुत बड़ा है। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने असम और तामिलनाडू में एक जनसभा को संबोधित किया और पुंडूचेरी में एक भी जनसभा को संबोधित नहीं किया। उनका भी पूरा फोकस पश्चिमी बंगाल में रहा। यहां उन्होंने लगातार कई जनसभाएं की। कल अंतिम दिन 24 परगना में योगी आदित्यनाथ रोड शो भी हुआ। जाहिर है कि पश्चिमी बंगाल के चुनाव का परिणाम योगी के लिए भी अग्निपरीक्षा है। पश्चिमी बंगाल योगी की ही मुख्यमंत्री के रूप में कई सभाएं हुई। बहरहाल, चार मई को आने वाला परिणाम उत्तर प्रदेश की सेमीफाइनल की तस्वीर तय करेगा कि 27 में फाइनल मैच कौन जीतेगा। इस बार का पश्चिमी बंगाल का चुनाव देश की राजनीति भी तय करेगा। क्योंकि यहां परिणाम से भी भाजपा खासकर मोदी और योगी के प्रति क्या माहौल इसका फैसला भी इन परिणामों से ही होगा। जय हिंद