देशभर में भारतीय जनता पार्टी नारी शक्ति वंदन संशोधन अधिनियम को लेकर अभियान चला रही है। लोकसभा में यह प्रस्ताव पास ना हो सका। भाजपा देशभर की महिलाओं को बता रही है कि कांग्रेस, सपा एवं टीएमसी समेत सभी विपक्षी दल महिला विरोधी हैं और वह नहीं चाहते कि आधी आबादी को उनका अधिकार मिले। भाजपा चाहती है कि देशभर की करोड़ों महिलाएं नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर विपक्ष को चुनाव में सबक सिखाए। इस मामले को लेकर कल सोमवार को प्रदेश के सभी नगर निगमों में निंदा प्रस्ताव लाया गया। गाजियाबाद में भी नगर निगम ने सदन की विशेष बैठक बुलाई और निंदा प्रस्ताव रखा, जो पास भी हो गया। लेकिन यह महत्वपूर्ण नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि गाजियाबाद नगर निगम सदन की बैठक में महिला पार्षदों की उपस्थिति काफी कम रही। नारी शक्ति वंदन अधिनियम निंदा प्रस्ताव पर चर्चा के लिए मात्र 17 पार्षद ही पहुंची। जबकि इनकी संख्या 38 बताई जाती है। इनमें भी विपक्ष की महिला पार्षद तो दो ही पहुंची। खैर विपक्ष तो नारी शक्ति वंदन अधिनियम के विरोध में है ही। मगर भाजपा के सभी पार्षद सदन में क्यों मौजूद नहीं थे। भाजपा की आधी महिला पार्षद सदन में थी ही नहीं। इसका अर्थ यह निकलता है कि देश के हालात चाहे जो भी हों, कम से कम गाजियाबाद की महिला पार्षदों को तो नारी शक्ति वंदन अधिनियम से कोई लेना देना है नहीं, या यूं कहें कि उनको चाहिए भी नहीं। । टोटल की बात करें तो गाजियाबाद नगर निगम में कुल 110 पार्षद हैं। सोमवार को हुई बैठक में 60 पार्षद मौजूद रहे। 40 पार्षदों की गैरमौजूदगी में प्रस्ताव पास करो या फेल, क्या ही फर्क पड़ता है। गाजियाबाद में अगर महिला राजनीति की बात करें तो यहां भाजपा में ही सबसे ज्यादा महिलाएं हैं। महिला मोर्चा तो है ही मुख्य संगठन में भी महिलाओं की संख्या है। भाजपा महिला मोर्चा ने हाल ही में विपक्ष का पुतला भी जलाया। मगर गाजियाबाद नगर निगम ने क्या संदेश दिया?