उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अब बहुत अधिक समय नहीं रह गया है। हालांकि वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल नियमानुसार मार्च 2027 तक है। मगर अंदाजा लगाया जा रहा है कि यूपी विधानसभा का चुनाव समय से पहले ही कराया जा सकता है। कहा तो यहां तक जा रहा है कि यूपी में विधानसभा चुनाव नवंबर-दिसंबर तक कराया जा सकता है। भाजपा ने समय पूर्व चुनाव की संभावना को लेकर तैयारी पहले से ही शुरू कर रखी है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी समय से पहले चुनाव की संभावना को देखकर तैयारी की बात कह चुके हैं। अभी तक यह भी तय है कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी, कांग्रेस से मिलकर चुनाव लड़ेगी। सोमवार को हुई इंडिया गठबंधन की बैठक में भी इसके संकेत दिए गए। यहां तक तो सब ठीक है। मगर जब हम गाजियाबाद के हालात देखते हैं तो मन में संशय आ जाता है। समाजवादी पार्टी के लिहाज से देंगे तो गाजियाबाद में संगठन की सक्रियता दिखाई नहीं दे रही है। अंदरखाने कुछ हो रहा हो पता नहीं मगर जमीन पर कुछ होता दिख नहीं रहा है। जिस तरह भाजपा प्रत्याशी का इंतजार किए बिना चुनाव पर फोकस कर चुकी है। भाजपा संगठन को कोई फर्क नहीं पड़ता कि अगले विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी वर्तमान विधायक रहेंगे या बदले जाएंगे। उनका प्रत्याशी कमल का फूल है। मगर सपा में ऐसा नहीं दिख रहा है। यहां प्रत्याशी की घोषणा का इंतजार हो रहा है। ऐसा लगता है चुनाव की सारी तैयारी सपा के प्रत्याशी पर ही होगी। मगर ऐन चुनाव के समय तैयारी नहीं की जा सकती। बूथ प्रबंधन संभालना संगठन का काम है। ऐसे हालातों में क्या सपा आगामी चुनाव में भाजपा का सामना करने के लिए तैयार है? गाजियाबाद कर सपा संगठन कुछ भी दावा करे, मगर इसमें बहुत संशय है। गाजियाबाद में कांग्रेस को आप एक सीट दे दो या तीन, इससे कोई फर्क पड़ता ही नहीं है। फर्क इस बात से पड़ता है कि सपा की तैयारी कैसी है।