मेरठ (युग करवट)। निजीकरण और उत्पीडऩात्मक कार्रवाई के विरोध में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति पश्चिमांचल इकाई द्वारा मेरठ मुख्यालय पर बिजली कर्मियों ने प्रदर्शन किया।
संघर्ष समिति उ0प्र0 के संयोजक शैलेन्द्र दुबे कहा कि यदि उत्पीडऩात्मक कार्यवाहियां तत्काल वापस नहीं ली गईं, तो प्रदेशव्यापी उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी। उन्होंने कहा कि कर्मियों पर प्रदेश की बिजली व्यवस्था बिगाडऩे के गलत आरोप लगाए जा रहे हैं। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के सेक्रेटरी दिल्ली के यशपाल शर्मा,जितेन्द्र सिंह गुर्जर, महेन्द्र राय, मोहम्मद वसीम, योगेन्द्र लाखा, आर सी पाल, सी पी सिंह, निखिल कुमार एवं भूपेन्द्र ने कहा कि पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण, ओबरा एवं अनपरा विद्युत परियोजनाओं को ज्वाइंट वेंचर के माध्यम से निजी हाथों में सौंपने की प्रक्रिया, गंगा कैनाल स्थित जल विद्युत परियोजनाओं को लीज पर देने तथा ट्रांसमिशन क्षेत्र में टैरिफ बेस्ड कॉम्पिटेटिव बिडिंग के जरिए निजीकरण के प्रयास बिजली व्यवस्था और उपभोक्ताओं दोनों के हित में नहीं हैं। इस दौरान संविदा कर्मियों की बहाली, आउटसोर्स कर्मियों को यूपी आउटसोर्स सेवा निगम में समाहित करने, निलंबित कर्मचारियेां की बहाली लंबित अनुशासनात्मक कार्रवाई को समाप्त करने की मांग रखी गई। समिति के संयोजक आलोक त्रिपाठी ने कहा कि आंदोलन के दौरान भी निर्बाध विद्युत आपूर्ति जारी रखी जाएगी।