अगर आप गाजियाबाद विकास प्राधिकरण द्वारा स्वीकृत कॉलोनी में फ्लैट खरीदना चाहते हैं तो बहुत सावधानी बरते। आपकी जरा सी लापरवाही आपके लिए बड़ी दिक्कत खड़ी कर सकती है।
300 मीटर से छोटे भूखंड पर प्राधिकरण या आवास विकास परिषद स्टिल्ट प्लस तीन मंजिल इमारत बनाने की अनुमति देता है। अगर बिल्डर ने ऐसे किसी भूखंड पर चार मंजिल बना रखी है तो चौथी मंजिल का फ्लोर या फ्लैट ना खरीदें क्योंकि वह पूरी तरीके से नशे के विपरीत बना है। उसकी कोई कानूनी वैधता नहीं है। प्राधिकरण या परिषद ऐसे निर्माण को कभी भी ध्वस्त कर सकता है।
बिल्डर लोगों को झूठ बोलकर फ्लैट और फ्लोर बेच रहे। इसलिए सावधान रहें और अपने पैसे को सुरक्षित रखें। इसके साथ ही फ्लैट खरीदने से पहले गाजियाबाद विकास प्राधिकरण या फिर आवास विकास परिषद के कार्यालय जाकर यह जांच जरूर कर ले की फ्लैट स्वीकृत मानचित्र के अनुरूप बने हैं या नहीं। खास तौर पर राजेंद्र नगर सेक्टर 2-3, 5, इंदिरापुरम वैशाली वसुंधरा गोविंदपुरम शास्त्रीनगर कवि नगर राज नगर एवं श्याम पार्क एक्सटेंशन में फ्लैट या फ्लोर खरीदते वक्त सावधानी बरते।
इसकी जागरूकता के लिए प्राधिकरण ने जगह-जगह बोर्ड भी लगवाए थे लेकिन लोगों का बहुत ज्यादा ध्यान उन पर नहीं जाता है और ना ही लोग प्राधिकरण की आधिकारिक भाषा को समझ पाते हैं इसलिए प्राधिकरण और परिषद को सरल भाषा में इसका प्रचार प्रसार करना चाहिए। आवास विकास परिषद को तो इस मामले में हाईकोर्ट की फटकार तक लग चुकी है एक छोटे से भूखंड पर फ्लैट माफिया ने 28 फ्लैट बनाकर बेच दिए थे हाई कोर्ट ने उसको तोडऩे का आदेश दे दिया था इसमें रहने वाले लोगों को अपने साथ तब ठगी का एहसास हुआ था। हालांकि बाद में लोगों के अनुरोध पर इस पर स्टे हो गया था। अब मेरठ में भी ऐसा ही हो रहा है। जिन लोगों ने आवासीय भूखंडों पूरी तरह से व्यावसायिक उपयोग करना शुरू कर दिया था उनके निर्माण सील करने के सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी किए हैं। अभी 44 ऐसे निर्माण सील करने को कहा गया है। इसलिए समय रहते सावधानी बरतना बहुत जरूरी है। बिल्डर तो बेचकर निकल जाएगा परेशानी रहने वाले को झेलनी पड़ेगी। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण और आवास विकास परिषद का यह नैतिक दायित्व बनता है कि वे लोगों को अवैध निर्माण को लेकर जागरूक करें। साथी फ्लैट माफियाओं द्वारा किए जा रहे अवैध निर्माण को गंभीरता से रोका जाए ताकि लोगों के साथ धोखाधड़ी न हो सके।