चर्चा-ए-आम
देश में हर रोज सामने आ रहे किसी न किसी खुलासे के बीच इन दिनों हमारी शिक्षा प्रणाली से जुड़ा जो एक बड़ा खुलासा सामने आया है वो अत्यंत चिंता जनक और पीड़ा दायक है द्य ऐसा लगता है मनो एक बड़ा शिक्षा माफिया गिरोह देश में सक्रिय हो रहा है जो सरकार की सभी व्यवस्थाओं को न केवल छोटा बना रहा है बल्कि सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती बनकर खड़ा हो गया है। हमारी शिक्षा व्यवस्था पिछले कई सालो से मेडिकल प्रवेश परीक्षा को ठीक से पूरा नहीं करा पा रही है । पिछले कई बार से ‘नीट’ की परिक्षा का प्रश्न पत्र लगभग हर साल लगातार ही लीख होता चला आ रहा है। इस मेडिकल परीक्षा में पिछले 6 सालो से 2 करोड़ से अधिक परीक्षार्थी परीक्षा में बैठे और उन सभी को हर बार ही निराशा हाथ लगी क्योंकि मेडिकल की यह प्रवेश परीक्षा हर बार पर्चा लीख होने की वजह से विफल होती रही और हर बार इतनी बड़ी संख्या में परीक्षार्थियों को हर बार ही दोबारा परीक्षा देनी पड़ी द्य अब सीबीएससी की बारहवीं परीक्षा का परीक्षा फल सामने आया और उससे जुड़े कई खुलासे भी देश के सामने आये तो सभी लोग भौचक्के से रह गए। हुआ यूँ जो होनहार विद्यार्थी थे और जिन्हें अपने अंक 90 से 100 आने की उम्मीद थी उनमे से अधिकंश के अंक 45 से 60 के बीच ही आये और कुछ तो एक या 2 विषय में फेल भी हो गए। इस परिणाम के आते ही देश में हा हा कार सा मच गया और साथ ही यह भी पता चला की इस बार के उत्तर पुस्तिका उन टीचरों ने बहुत कम जाँची जिन्हें वे भेजी गयी थी। बड़ी संख्या में ऐसे टीचरों ने कॉपियाँ की जाँच का काम आगे ठेके पर दे दियाद्य देश के कई टीवी चैनेलों ने अपने समाचारों में दिखाया की बड़ी संख्या में कॉपियाँ जाँचने का काम उम्र के नवयुवक कर रहें हैं जिनमें कई तो बी.ए. पास भी नहीं हैं। इस खुलासे के बाद जब असंतुष्ट विद्यार्थियों ने अपनी कॉपियाँ दोबारा जाँचने के लिए ऑनलाइन अवेदन किया तो पता चला की सीबीआई का यह ऑनलाइन आवेदन करने का प्रावधान काम ही नहीं कर रहा है और कई दिनों तक बंद रहा। इस पर भी मीडिया ने यह खुलासा किया की सीबीआई के इस पोर्टल को पेशेवर लोगो ने नहीं बनाया बल्कि यह वेबसाइट भी कॉलेज के स्टूडेंटस ने ही बनाया है। इन सभी घोर अनियमिताओं के चलते जो एक और बहुत बड़ा खुलासा हुआ उसने तो पुरे देश को ही हैरानी में दाल दिया द्य हुए खुलासे के मुताबिक किसी बड़े माफिया ने कॉपियों की जाँच पूरी होने के बाद कॉपियों को ही आपस में बदल दिया। यानि जिन स्टूडेंट्स के 90 से अधिक अंक थे उनकी उत्तर पुस्तिका के अंदर के पृष्ट उन स्टूडेंट्स की उत्तर पुस्तिका के पृष्ठों के साथ बदल दिया जिनके अंक 45 से 60 अंको के बीच थे। दोबारा जाँच के दौरान कई स्टूडेंट्स ने टीवी चैनलो को बताया की उनकी उत्तर पुस्तिका के अंदर के पृष्ट बदले हुए हैं द्य ऊपर के तो प्रथम पृष्ट पर तो उनका अपना लेख है लेकिन अंदर के पृष्ठों पर लेख बदला हुआ है।
हम एक ओर विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में बढऩे की बात कर रहें हैं और भारत को विश्व गुरु बनाने का दवा कर रहें हैं वहीं हम दूसरी ओर स्कूली छात्रों की परीक्षाएं नहीं करा पा रहे हैं और पिछले कई सालो से मेडिकल परीक्षाओं सहित विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार पाने की प्रवेश परीक्षायें भी सफलतापूर्ण पूरी नहीं करा पा रहें हैं द्य इतना ही नहीं इन सब भ्रष्टाचारपूर्ण असफलताओं के पीछे सम्बंधित सरकारी विभागों की जिम्मेवारी भी तय नहीं कर पा रहे हैं ।