गाजियाबाद (युग करवट)। भारतीय जनता पार्टी फायर ब्रांड नेता पूर्व विधायक संगीत सोम और मुजफ्फरनगर से भाजपा के पूर्व सांसद एवं केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान के बीच जो शब्दों के तीर चल रहे हैं और जो एक दूसरे के खिलाफ बयानबाजी चल रही है इसके बीच रालोद के प्रमुख एवं केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी एक नया फार्मूला २०२७ के विधानसभा चुनाव एनडीए के सामने रख सकते हैं। दरअसल, कोई कितना भी अपने आप को किसानों का या जाट समाज का हितैषी मान लें लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री स्व. चौ.चरण सिंह की जगह कोई नहीं ले सकता और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाट जयंत चौधरी में दादा का यानि बड़े चौधरी साहब का अक्स देखते हैं। हालांकि कुछ जाट जयंत चौधरी के भाजपा में जाने से नाराज भी है। लेकिन जयंत चौधरी के पास भी भाजपा का दामन थामने के अलावा कोई रास्ता नहीं था। मेरठ के सकौती टांडा में जो जाट संसद हुई उसमें भले ही जयंत चौधरी नहीं आये हैं क्योंकि उनका एक प्रोटोकॉल भी है और वो एनडीए में भी है सकौती में अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा के खिलाफ बयानबाजी हुई। हालांकि निशाने पर पूर्व विधायक संगीत सोम रहे लेकिन जो बातें कही गई वो भी भाजपा के खिलाफ ही थी। संगीता सोम और संजीव बालियान के बीच छत्तीस का आंकड़ा जगजाहिर है और दोनों और से २०२७ के विधानसभा चुनाव में सूद सहित बदला लेने की बातें कही जा रही थी। लेकिन इस बीच रालोद प्रमुख केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी इन दोनों के बीच चल रही तनातनी का लाभ भी लेना चाहते हैं। वो अपनी मजबूत स्थिति दर्शाते हुए एनडीए से इस बार ठीक ठाक सीटें लेने की तैयारी कर रहे हैं। पूर्व सांसद केसी त्यागी के रालोद में आने के बाद रालोद का अपने आप में एक और मजबूत नेता के जुडऩे से माहौल बदला है। हालांकि पहले से ही त्यागी समाज के एक मजबूत नेता त्रिलोक त्यागी रालोद में लंबे समय से शामिल हैं और वो कई बार चुनाव भी लड़ चुके हैं। कुछ समय से त्रिलोक त्यागी रालोद को और मजबूत करने के लिए प्रदेश के अलावा अन्य प्रदेशों में भी दौरे करके रालोद का कुनबा बढ़ा रहे हैं। त्रिलोक त्यागी कहते हैं कि उनका प्रयास है कि संगठन बढ़ाया जाए और जयंत चौधरी के हाथ मजबूत किये जाए। वहीं जयंत चौधरी के करीबियों की बातों पर भरोसा करें तो जयंत चौधरी इस बार बागपत के साथ सरधना की सीट भी अपने पास रखना चाहते हैं। सरधना सीट से ही भाजपा के टिकट पर संगीत सोम चुनाव लड़ते आये हैं। २०२२ के विधानसभा चुनाव में सपा के अतुल प्रधान चुनाव जीते हैं। वहीं किठौर और सिवाल खास भी रालोद अपने पास चाहती है। इसके अलावा त्यागी बाहुल्य सीट मोदीनगर भी रालोद लेने पर विचार कर रही है। दरअसल, किठौर और मोदीनगर सीट पर पूर्व सांसद केसी त्यागी के बेटे अमरीश त्यागी को रालोद मैदान में उतार सकती है। रालोद का अपना संगठन और केसी त्यागी का अपना वजूद अमरीश त्यागी का व्यवहार उनकी जीत में अहम भमिका निभाएगा।