करीब 10 साल पहले विधानसभा चुनाव के दौरान जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली जनसभा गाजियाबाद में की थी तो उसमें उन्होंने साफ तौर पर कहा था गाजियाबाद विकास प्राधिकरण और तथाकथित बिल्डरों की मिली भगत का जो खेल चल रहा है उसे खत्म किया जाएगा। सरकार बदली प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी और अवैध निर्माण पर अंकुश भी लगा लेकिन यह बहुत अधिक समय तक नहीं चल पाया। भाजपा के नेता और कार्यकर्ता ही खुद अवैध निर्माण में लिप्त हो गए। फिर से अवैध रूप से फ्लैट बनाने का काम शुरू हो गया है। प्राधिकरण पास करता है तीन मंजिल और मिली भगत करके चार मंजिल बनाई जा रही है जो पूरी तरह से गैरकानूनी है। हर फ्लैट माफिया ने एक भाजपा नेता को साद रखा है जिसकी छत्रछाया में बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण किया जा रहा है। जो काम पहले सपा वाले करते थे वह अब बीजेपी वाले करने लगे हैं। फिर उनमें और इनमें क्या अंतर रह गया। भाजपा के नेता शायद अपने प्रधानमंत्री की बात को भूल गए हैं। अवैध निर्माण अब महानगर के लिए अभिशाप हो गया है।अधिकांश आवासीय योजनाएं इसकी वजह से फेल होती जा रहे हैं । ना तो सीवरेज सुविधा मिल पा रही है और ना ही बिजली पानी। सडक़ों की हालत भी बहुत खराब है। चुनाव के समय नेता इन्हीं समस्याओं के समाधान की बात जनता के बीच करते हैं और चुनाव के बाद खुद ही अवैध निर्माण में लिफ्ट हो जाते हैं। जब कोई ईमानदार अधिकारी उनकी नहीं सुनता तो कहते हैं हमारी चलती ही नहीं है। अब समय आ गया है कि नेताओं को समझना चाहिए कि वह क्या गलत कर रहा है । यह शहर उनका भी है इसलिए इसको संवारने की तरफ ध्यान देना चाहिए बिगडऩे की तरफ में नहीं।