उत्तर प्रदेश सरकार के स्वतंत्र प्रभार मंत्री नरेन्द्र कश्यप रविवार को एक बड़ा कार्यक्रम करने जा रहे हैं। कार्यक्रम का नाम महर्षि कश्यप महाकुंभ है। वैसे तो नरेन्द्र कश्यप इस कार्यक्रम को हर साल ही करते हैं। मगर इस बार इस आयोजन की महत्ता इसलिए बढ़ गई है, क्योंकि कार्यक्रम की जानकरी देने के लिए बुलाई गई प्रेस वार्ता में नरेन्द्र कश्यप ने मुजफ्फरनगर से विधानसभा चुनाव लडऩे की मंशा जता दी है। बताते हैं वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भी नरेन्द्र कश्यप ने मुजफ्फरनगर से टिकट की मांग की थी। मगर भाजपा नेतृत्व ने उन्हें संगठन में ही लगाए रखा। उसके बाद व मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष बने फिर सरकार में मंत्री बना दिए गए। अब अगले साल उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होगा। इसके लिए सभी दलों ने कमर कस ली है। संभावित प्रत्याशियों ने भी तैयारी शुरू कर दी है। नरेन्द्र कश्यप ने भी मुजफ्फरनगर में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। वह लगातार मुजफ्फरनगर के दौरे कर रहे हैं, वहां के लोगों के सुख-दुख में शामिल हो रहे हैं। एकाएक बढ़ी सक्रियता ने ही लोगों के मन में सवाल पैदा कर दिए थे। नरेन्द्र कश्यप ने लोगों के सामने अपनी मंशा जाहिर कर दी है। बताया तो यह भी जा रहा है कि ऊपर से श्री कश्यप को इशारा भी मिल चुका है। अब अगर 2027 का विधानसभा चुनाव वह मुजफ्फरनगर से लड़ते हैं तो जाहिर सी बात है कि उनको वहीं रहना होगा। अब मुजफ्फरनगर रहेंगेे तो गाजियाबाद आना जाना भी कम हो जाएगा। ऐसे में इस बात से कोई कैसे इंकार कर सकता है कि उनकी गाजियाबाद में सक्रियता कम हो जाएगी। यह तो मुजफ्फरनगर की बात है। राजनगर में रहने वाले सुनील शर्मा ने साहिबाबाद और हिंडनपार में रहने वाले संजीव शर्मा ने गाजियाबाद सीट से चुनाव लड़ा तो उनको वहीं पर आशियाना बनाना पड़ा। यहां तो जिला ही बदलने की बात है। यदि ऐसा होता है तो गाजियाबाद के उनके समर्थकों में निराशा आनी स्वाभाविक ही है।