भाजपा का नया प्रयोग
गाजियाबाद (युग करवट)। इस बार भारतीय जनता पार्टी पश्चिम बंगाल में नया प्रयोग करने जा रही है। विधानसभा चुनाव में चार साधु-संतों को जहां टिकट दिये हैं वहीं उत्तर प्रदेश के योगी की तरह हिंदुत्व का झंडा बुलंद करने वाले उत्पल महाराज को मैदान में उतारा है।
हालांकि उत्पल महाराज के चुनाव मैदान में उतारने से पश्चिमी बंगाल में आरएसएस नाराज दिखाई दे रहा है और आरएसएस ने बकायदा एक पत्र जारी करके उत्पल महाराज को निष्कासित कर दिया और साथ ही कहा कि एक योगी चुनाव नहीं लड़ सकता। भाजपा हाईकमान पश्चिमी बंगाल में इस बार बहुत ही रणनीति के साथ एक-एक सीट पर छानबीन के बाद ही उम्मीदवार उतार रही है। यही कारण है कि कई मौजूदा विधायकों के टिकट काट दिये।
पश्चिम बंगाल में भी हिंदुत्व को लेकर भाजपा ने रणनीति तैयार की है और योगी की तरह बेबाक तरीके से हिंदूत्व की लड़़ाई लडऩे वाले एक योगी को चुनाव में उतारा है। आरएसएस के संगठन बीएसएस के प्रमुख उत्पल महाराज को 16 मार्च को भाजपा ज्वाइन कराई और फिर कालियागंज से उन्हें उम्मीदवार घोषित कर दिया। यहां से मौजूदा एमएलए राय का टिकट काट दिया गया। उत्पल महाराज पश्चिम बंगाल में हिंदुत्व की सोच रखने वाले माने जाते हैं। उनका अंदाज भी यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तरह ही है। आरएसएस यानि संघ की ओर से एक लेटर जारी किया गया जिसमें उत्पल महाराज को निष्कासित ही नहीं किया गया बल्कि नाराजगी भी जाहिर की गई एक संन्यासी राजनीति में नहीं आ सकता।
पत्र में कहा गया है कि एक संन्यासी योगी सांसारिक जीवन से दूर हो जाता है और वो कभी राजनीति नहीं कर सकता। हालांकि उत्पल महाराज का कहना है कि संन्यास का अर्थ भी समाज सेवा ही है और वो इसी उद्देश्य को लेकर चुनाव मैदान में उतरे हैं। उनका कहना है कि बहुत सी बातें वो खुलकर नहीं कर सकते थे। हिंदुत्व की मदद नहीं कर सकते थे इसलिए अब राजनीति में रहकर वो अब खुलकर मदद भी कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह पश्चिम बंगाल में हिंदुओं पर अत्याचार हो रहे हैं उनको त्योहार मनाने की इजाजत नहीं दी जाती है अब इसी के खिलाफ वो आवाज बुलंद करेंगे। बहरहाल, भाजपा का ये नया प्रयोग पश्चिम बंगाल में कितना सफल रहेगा ये तो मतगणना वाले दिन ही पता चलेगा।