गिरे नहीं बल्कि ऐसा लगा जैसे किसी ने दिया जोर का झटका
गाजियाबाद (युग करवट)। श्रीश्री १००८ श्रीमद् जगदगुरु श्री कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम् जी महाराज कल अस्पताल से डिस्चार्ज हो गये। हालांकि अभी भी डॉक्टर्स ने 24 घंटे पूरी तरह से निगरानी में रखने को कहा है। डॉक्टर्स का कहना है कि अभी अगर सूजन नहीं आती है तो फिर खतरा नहीं है। सिर में जो चोट लगी है वो ढाई इंच बड़ा जख्म है और 28 टांके लगाये गये हैं। दो घंटे ऑपरेशन चला है।
आचार्य प्रमोद कृष्णम् के गिरने का समाचार पाकर उनके चाहने वालों में हडक़ंप मच गया था। बड़ी संख्या में लोग अस्पताल और निवास पर पहुंचे थे डॉक्टरों ने अभी उन्हें आराम की बात कही है। इस हादसे को देखकर यही लगता है कि आचार्य प्रमोद कृष्णम् पर बहुत बड़ा कोई संकट था जो लोगों की दुआओं से टल गया। वरना जिस तरह वो गिरे हैं केवल और केवल सिर पर ही चोट आयी है ये भी अपने आप में एक विचारणीय प्रश्न है। क्या प्रमोद कृष्णम खुद गिरे या फिर किसी तंत्र-मंत्र के जरिये उन्हें कमजोर करने का प्रयास किया गया। क्योंकि राजनीतिक तौर पर आचार्य प्रमोद कृष्णम् किसी दबाव में नहीं आते और प्रधानमंत्री द्वारा कल्कि धाम का शिलान्यास करना उसके बाद जगद्गुरु जैसी उपाधि उनको मिलना ये एक बहुत बड़ी उपलब्धी है। किसी की बढ़ती शौहरत और नाम से कहीं ना कहीं कुछ लोग अंदर खाने ईष्र्या भी रखते हैं इससे भी इनकार नहीं किया जा सकता। घटना से चार दिन पहले यानि 14 मार्च को सुधांशू जी महाराज ने आचार्य प्रमोद कृष्णम् को आगाह किया था कि आपके साथ कोई घटना हो सकती है। सामने से कोई वार नहीं करेगा। कोई तंत्र-मंत्र के जरिये आपको कमजोर कर सकता है। आप ये उपाय कर लें। आचार्य जी ने इस बात को गंभीरता से नहीं लिया और 18 मार्च को उनके साथ ये घट गया। आचार्य प्रमोद कृष्णम् जिस तरह से फर्श पर गिरे वो साधारण बात नहीं है।
जब कोई व्यक्ति मुंह के बल गिरता है तो उसके चेहरे पर हाथ-पांव पर चोट आती है। लेकिन आचार्य प्रमोद कृष्णम् के शरीर के किसी हिस्से पर या चेहरे पर कोई खरोंच तक नहीं आयी। केवल और केवल माथा यानि सिर पर चोट आयी है। आचार्य प्रमोद कृष्णम् बताते हैं कि उन्हें लगा जैसे किसी ने उनको एक जबरदस्त पटखनी दी हो। उन्होंने बताया कि 40 सेकेंड तक उनको पता ही नहीं चला और जब वो उठे तो लहूलुहान थे। कई और साधू संतों ने भी इसी तरह की बात कही कि कहीं ना कहीं कोई तंत्र विद्या के जरिये आचार्य प्रमोद कृष्णम को कमजोर करने का प्रयास किया गया है। आचार्य प्रमोद कृष्णम् वास्तव में बाल-बाल बच गये और उन पर बड़ा संकट था जो टल गया। वो बहुत ही निडर इंसान हैं यही कारण है कि वो गिरने के बाद खुद ही बिना बताये सुरक्षाकर्मियों और ड्राइवर के साथ यशोदा अस्पताल पहुंचे जहां डॉक्टरों ने उन्हें तत्काल ओटी में लेकर सर्जरी की।
मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्रियो, मंत्रियों एवं साधु-संतों ने फोन पर जाना आचार्य प्रमोद कृष्णम् के स्वास्थ्य का हाल
आचार्य प्रमोद कृष्णम् के हादसे में घायल होने की सूचना मिलते ही दूरभाष पर बड़ी संख्या में लोगों ने उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी, यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौया, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, ऊर्जा मंत्री एके शर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री कमलनाथ, चक्रपाणि महाराज, अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष सहित देश के कई बड़े साधु-संतों और अखाड़ों से जुड़े, मठों से जुड्े साधु-संतों के साथ कथावाचक रामभद्राचार्य ने आचार्य प्रमोद कृष्णम् के स्वास्थ्य की जानकारी ली और उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की।