प्रयागराज (युग करवट)। जगदगुरू शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के अधिवक्ता डॉ. पीएन मिश्रा ने कहा कि शंकराचार्य और उनके शिष्य पर मुकदमा दर्ज कराने वाले आशुतोष ब्रह्मïचारी अपने ही बुने जाल में फंसते जा रहे हैं। वह सफेद झूठ का पुलिंदा न्यायालय के सामने प्रस्तुत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य की ओर से इनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराने के लिए जल्द ही न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा। जिला न्यायालय में सुनवाई के सिलसिले में स्वामी मुकुंदानंद गिरि के साथ प्रयागराज पहुंचे डॉ. मिश्र ने मीडिया से बातचीत में कहा कि आशुतोष ब्रह्मïचारी ने कोर्ट में शपथ पत्र देकर शंकराचार्य और उनके शिष्य मुकंदानंद का पासपोर्ट जब्द करने की गुहार लगाई है, ताकि वह विदेश न भाग सकें। सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता डॉ. मिश्र बोले पहली बात कि शंकराचार्य और उनके शिष्य मुकुंदानंद के पास कोई पासपोर्ट नहीं है। दूसरी बात धर्मशास्त्रों में धर्माधीश या शंकराचार्य को देश की सीमा के बाहर जाने पर निषिद्ध किया गया है। वह धर्म प्रचार के लिए विदेश नहीं जा सकते हैं, क्योंकि वह समुद्र को नहीं लांघ सकते हैं। अगर जाते हैं तो पतित घोषित हो जाएंगे। 1940 में विदेश यात्रा करने पर पुरी के शंकराचार्य को पतित घोषित किया जा चुका है।