गाजियाबाद (युग करवट)। निगम पार्षदों को बोर्ड बैठक को लेकर मन में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। पार्षदों का कहना है कि पिछले लगभग एक साल से बोर्ड बैठक की तैयारी की तारीख देने के बाद तारीख बदली जा रही है। निगम अधिकारियों व महापौर का बोर्ड बैठक मेें देरी होने का कारण निगम कार्यकारिणी सदन कक्ष पूरा ना होने था, इस कारण देरी हुई। लेकिन पार्षदों का कहना है कि निगम अधिकारी व महापौर व अपनी तानाशाही के कारण बोर्ड बैठक नहीं करा रहे है जिसके कारण शहर के विकास कार्य मेें भी परेशानी हो रही है। वही निगम कार्यकारिणी उपाध्यक्ष प्रवीण चौधरी ने निगम पार्षदों के साथ एक बैठक करते हुए बोर्ड बैठक में सभी निगम पार्षदों को एकजुट होकर एक दूसरे का साथ देने और शहर के विकास को लेकर गंभरीता से अपनी बात रखने की बात कहीं है। साथ ही उन्होंने कहा कि महापौर व निगम अधिकारियों द्वारा शहर की जनता पर सौंपे जा रहे हाउस टैक्स का पूरजोर तरीके से विरोध करना है। नई दरों से व्यापारियों से १७०२ दुकान का किराया वसूली का विरोध किया जाएगा। इस दौरान निगम के सभी अलग अलग वार्ड की मुख्य समस्या का हल कराने को लेकर बैठक में चर्चा की गई।
बैठक के दौरान निगम कार्यकारिणी उपाध्यक्ष प्रवीण चौधरी, राजीव शर्मा, नीरज गोयल, पूनम सिंह, संजय ंिसंह, अनिल तोमर, मनोज गोयल,मनोज त्यागी आदि मौजूद रहे

शहर के विकास के लिए हर दो माह में होनी तय बोर्ड बैठक
नगर निगम एक्ट के अनुसार हर दो माह के भीतर बोर्ड बैठक कराना अनिवार्य है। लेकिन नगर निगम अधिकारी व महापौर की सांठगांठ के कारण बोर्ड बैठक नहंी कराई जा रही है। महापौर बोर्ड बैठक का बार-बार समय बदला जा रहा है। जिसके कारण शहर में विकास नहीं हो पा रहा है। यदि महापौर की बोर्ड बैठक कराने की मंशा होती तो नगर निगम मुख्लाय के बाहर किसी भी सभागार में हो जाती। निगम पार्षद भी जानते है। आग लगने के कारण सभा कक्ष तैयार नंही लेकिन ऐसा नहंी निगम एक्ट में ऐसा नही है बोर्ड बैठक बाहर नहंी हो सकती निगम एक्ट के अनुसार हर दो माह में बोर्ड बैठक कराना अनिवार्य है।