गाजियाबाद (युग करवट)। नगर निगम द्वारा हाउस टैक्स बढ़ोत्तरी के मामले में हाईकोर्ट इस हफ्ते कोई फैसला दे सकता है। उम्मीद है कि कल इस पर कोई फैसला आ सकता है। इस फै सले पर लगभग 5.5 लाख करदाताओं की नजर है। हाउस टैक्स बढ़ोतरी के विरोध में नगर निगम पार्षद व जनप्रतिनिधियों ने खुलकर अपना विरोध दर्ज कराया लेकिन निगम अधिकारी टस से मस नहीं हुए। लेकिन महापौर ने जनता को राहत देते हुए २० प्रतिशत गृहकर में छूट को बढ़ाया हुआ है लेकिन शहर के ५० प्रतिशत लोगो ने बढ़ी दरों पर हाउस टैक्स जमा नहंी किया लोगो को कोर्ट के फैसले का बेस्रबी से इंतजार है। वहीं महापौर ने बढ़े हुए टैक्स का प्रस्ताव भी रद्द करा दिया।
जबकि याचिकाकर्ता पूर्व पार्षद राजेन्द्र त्यागी का कहना है कि नगर निगम को करदाताओं की चिंता नहीं है। यदि चिंता होती है निगम के अधिकारी अदालत में टैक्स नहीं बढ़ाने का शपथ पत्र दाखिल कर सकते थे। वित्तीय वर्ष 2024-25 में नगर निगम ने लगभग 330 करोड़ रुपये टैक्स में रूप में वसूले थे। इस वित्तीय वर्ष अभी तक लगभग 200 करोड़ रुपये ही वसूले गए हैं। नगर निगम ने टैक्स 300 गुना बढ़ा दिया गया है। उन्होंने बताया कि कानूनी रूप से नगर आयुक्त टैक्स नहीं बढ़ा सकते हैं। नगर आयुक्त बोर्ड बैठक में टैक्स बढ़ाने का प्रस्ताव रख सकते हैं। टैक्स को बोर्ड बैठक में ही बढ़ाया जा सकता है। बोर्ड बैठक के मिनट्स निगम की ओर से कोर्ट में दाखिल कर दिए गए हैं। जबकि ये मिनट्स पार्षदों को भी देने चाहिए थे। टैक्स बढ़ाने के केस को नगर निगम जनता के पैसे से लड़ रहा है।
टैक्स बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया था निरस्त
नगर निगम सदन कक्ष में 30 जून 2025 को महापौर सुनीता दयाल की अध्यक्षता में हाउस टैक्स बढ़ोतरी के संबंध में बैठक हुई थी। बैठक में सांसद अतुल गर्ग, महापौर सुनीता दयाल, प्रदेश सरकार में कैबिनेट सुनील शर्मा, विधायक संजीव शर्मा व अजीतपाल त्यागी, पार्षद और अधिकारी मौजूद रहे थे। सर्व सम्मति से हाउस टैक्स बढ़ोतरी के प्रस्ताव को निरस्त कर दिया गया था। पूर्व पार्षद राजेंद्र त्यागी और पूर्व पार्षद हिमांशु मित्तल ने हाउस टैक्स बढ़ाने के विरोध में याचिका हाईकोर्ट में दायर कर दी थी।
पार्षदों ने आरोप लगाया कि निगम ने हाउस टैक्स निरस्त करने के लिए हुई बैठक के मिनट्स की कापी उन्हें उपलब्ध नहीं कराई